कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कम खेलों के बावजूद भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने 13 गोल्ड और 17 सिल्वर और 9 ब्रोंज मेडल सहित कुल 39 मेडल जीते थे। भारत ने चौथे नंबर पर फिनिश किया था और स्वदेश लौटने पर एथलीटों का भव्य स्वागत भी किया गया, लेकिन कुछ नेताओं को इन एथलीटों की उपलब्धि का इल्म नहीं है, वरना ऐसी गलती नहीं होगी। महाराष्ट्र में एमनएस चीफ ने इन एथलीटों को 2-3 घंटे का इंतजार कराया, जिसकी आलोचना हर तरफ हो रही है।
राज ठाकरे और दिलीप गावित (साभार-X)
पैरा एथलीट दिलीप गावित का अपमान
39 मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों में एक पैरा एथलीट दिलीप गावित भी हैं जिन्होंने पुरुषों की 100 मीटर टी47 दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बने। लेकिन वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ाने वाले इस एथलीट को कुछ ही दिनों बाद एक ऐसी परिस्थिति से गुजरना पड़ा जिन्हें वह शायद ही कभी भूल पाएंगे। गावित को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) चीफ राज ठाकरे ने मिलने के लिए अपने आवास पर बुलाया था, लेकिन गावित उनसे मुलाकात करने से पहले ही उठकर चले गए।
कोच ने दी मामले की जानकारी
पीटीआई से बातचीत में दिलीप गावित के कोच वैजनाथ काले ने बताया कि महाराष्ट्र के रहने वाले दिलीप गावित को राज ठाकरे ने नासिक दौरे के दौरान उनसे मिलने का निमंत्रण दिया था। लेकिन वे वहां दो घंटे तक इंतजार करते रहे, लेकिन एमएनएस चीफ उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद गावित बिना उनसे मिले जाना पड़ा। काले ने पीटीआई को बताया,"हम काफी देर से इंतजार कर रहे थे... सर व्यस्त हैं। हम उनसे बाद में मिलेंगे,"
पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भारत के दिलीप गावित ने गोल्ड और मुहम्मद बासिल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। महाराष्ट्र के एथलीट गावित ने 10.71 सेकंड का समय निकालकर पोडियम पर टॉप पर फिनिश किया। यह समय चैंपियनशिप के इतिहास में इस श्रेणी में वर्ल्ड रिकॉर्ड है। बासिल ने 10.83 सेकंड में दौड़ पूरी करके रजत पदक जीता।
नासिक के पास तोरण डोंगरी में एक किसान परिवार में जन्मे गावित को उस समय गहरा सदमा लगा जब चार साल की उम्र में पेड़ से गिरने के कारण उनका एक हाथ कट गया। बताया जाता है कि चोट लगने के बाद उनके माता-पिता उन्हें आयुर्वेदिक अस्पताल ले गए और उनके हाथ पर पट्टी बांधी। हालांकि, हाथ में गैंग्रीन हो गया और दुर्भाग्यवश बाद में उसे काटना पड़ा।
"मैं एक छोटे से गाँव से आता हूँ। पहले मैं गाँव में खेती-बाड़ी का काम करता था। फिर मेरे कोच ने मुझे दौड़ते हुए देखा और मुझे प्रशिक्षण के लिए नासिक आने को कहा और वहीं से मेरी यह यात्रा गोल्ड तक पहुंची।
