Rohit Sharma as Mentor: भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। रोहित शर्मा का बतौर कप्तान कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो गया। विराट कोहली के बाद सीमित ओवर क्रिकेट की कमान संभालने वाले रोहित ने अपने चार साल के कार्यकाल में भारतीय टीम को नई सोच, नई दिशा और दो बड़ी आईसीसी ट्रॉफियां दिलाईं। अब युवा बल्लेबाज शुभमन गिल को वनडे टीम का कप्तान बनाया गया है।यह फैसला उस पीढ़ी परिवर्तन की शुरुआत है जो 2027 विश्व कप की ओर ले जाएगा। इसके बाद अब सभी की नजर भारत के सबसे सफल वनडे कप्तानों में शुमार रोहित शर्मा पर टिकी हुई है। उनकी बल्लेबाजी कैसी रहती है और क्या वे विराट और धोनी की तरह टीम का मार्गदर्शन कर पाएंगे।
चयन समिति के इस साहसिक फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया है। रोहित ने आईसीसी ट्रॉफी के लिए भारत के 11 साल के इंतज़ार को खत्म किया, टीम को 2024 में टी20 विश्व कप दिलाया और इसके बाद इस साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती। कई लोगों का मानना था कि इस सफलता से उन्हें 2027 तक कप्तान के रूप में बने रहने का मौका मिलेगा।हालांकि, जब से रोहित ने इंडियन प्रीमियर लीग के बीच में ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था, तब से ही यह बात स्पष्ट थी कि बदलाव अब दूर नहीं है।
रोहित शर्मा लाए नई सोच
रोहित शर्मा ने 2022 के टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मिली हार के बाद खुलकर स्वीकार किया कि भारतीय बल्लेबाज असफलता के डर में खेल रहे हैं।उन्होंने खुद उदाहरण पेश किया और 36 की उम्र में अपनी बल्लेबाजी शैली को पूरी तरह बदल दिया। अब वे पावरप्ले में ही आक्रामक अंदाज अपनाने लगे, जोखिम उठाने लगे।उनकी स्ट्राइक रेट तीनों प्रारूपों में 100 से ऊपर पहुंच गई। यह वही खिलाड़ी थे जो कभी 'धीरे शुरू करो, अंत में विस्फोट करो' फॉर्मूला अपनाते थे। लेकिन अब वही आक्रामकता का प्रतीक बन गए।
आक्रामक सोच से मिली दो आईसीसी ट्रॉफियां
रोहित के इस बदलाव का असर पूरे भारतीय सेटअप पर दिखा। टीम ने उसी सोच को अपनाया और टी20 विश्व कप तथा चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर यह साबित किया कि आधुनिक क्रिकेट में आक्रामकता ही सफलता की कुंजी है।आज सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में जो तेज़तर्रार भारतीय टी20 टीम खेल रही है, वह असल में रोहित शर्मा द्वारा शुरू की गई इस “नई सोच” का ही विस्तार है।
रोहित के सामने बड़े सवाल
रोहित के अब कप्तान नहीं होने और शुभमन गिल के हाथों में कमान जाने के बाद,उनके भविष्य को लेकर कई सवाल उठते हैं। क्या रोहित उसी गति से बल्लेबाजी करते रहेंगे जो उन्होंने अपने कप्तानी करियर के अंतिम दौर में पसंद की थी? क्या वह ये जोखिम उठा सकते हैं? क्या गिल और गौतम गंभीर की अगुवाई वाला टीम प्रबंधन उनका समर्थन करेगा? और अगर वह एक-दो बार असफल भी होते हैं, तो क्या उन्हें 2027 विश्व कप की तैयारी में जोखिम भरा रवैया अपनाने की आज़ादी दी जाएगी? ये सवाल जब विराट और धोनी ने कप्तानी छोड़ी थी तब उनके सामने नहीं थे।
क्या विराट और धोनी की राह पर चल पाएंगे रोहित?
भारत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जब 2017 में टीम की कप्तानी छोड़ी थी तो वे विराट कोहली के मार्गदर्शक के रुप में 2019 तक खेलते रहे। धोनी ने निचले क्रम में कई दमदार पारियां खेली और टीम के मजबूत अंग बनकर खड़े हुए। वे विकेटकीपिंग करते हुए स्टंप के पीछे से ही विराट को सलाह देते रहते थे और धोनी-कोहली की जोड़ी भारत के लिए सफल रही। धोनी के बाद 2021 में विराट कोहली भी कप्तानी से हट गए। कोहली का 2022 में फॉर्म अच्छा नहीं रहा लेकिन वे रोहित के साथ बने रहे और हिटमैन ने भी उन्हें हमेशा सपोर्ट किया और वे अब चाहेंगे कि गिल भी उनके साथ रहे अगर वे खराब खेलते हैं तो। विराट ने हालांकि बाद में 2023 वर्ल्ड कप बल्ले के साथ-साथ फील्ड पर भी रोहित का साथ दिया और मार्गदर्शक के रुप में भी अपनी भूमिका अच्छे से निभाई।
