IND vs ENG 4th Test: भारतीय क्रिकेट में टीम चयन को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। इस बार मुद्दा है बाएं हाथ के कलाई स्पिनर कुलदीप यादव को प्लेइंग इलेवन से लगातार बाहर रखे जाने का। इस विवाद पर पूर्व भारतीय कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
कप्तान की प्राथमिकता को मिले वरीयता: गावस्कर
सुनील गावस्कर का मानना है कि टीम चयन में अंतिम फैसला लेने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ कप्तान का होना चाहिए। उनका इशारा साफ था कि शुभमन गिल की कुलदीप यादव को खिलाने की इच्छा शायद पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा, "आखिरकार, यह कप्तान की टीम होती है। अगर कप्तान किसी खिलाड़ी को टीम में चाहता है तो वह होना चाहिए।"
कोच के हस्तक्षेप पर सवाल
गावस्कर ने यह भी संकेत दिया कि मुख्य कोच गौतम गंभीर की भूमिका टीम चयन में अधिक प्रभावी हो सकती है। उनका कहना है कि यह भी संभव है कि कोच ऐसे खिलाड़ियों को तरजीह दे रहे हैं जो बल्ले से योगदान दे सकें। उन्होंने हेडिंग्ले टेस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की मजबूत शुरुआत के बावजूद पारी जल्द सिमट जाना, एक संतुलित गेंदबाजी आक्रमण की कमी की ओर इशारा करता है।
कुलदीप यादव की अनदेखी पर उठे सवाल
गावस्कर और क्रिकेट विशेषज्ञों की चिंता का बड़ा कारण यह भी है कि कुलदीप यादव जैसे मैच विनर को पूरी श्रृंखला में एक भी टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला। खासकर जब उन्होंने जो रूट जैसे बल्लेबाज को 2018 में दो बार तीन गेंदों में आउट किया था। रूट ने मौजूदा चौथे टेस्ट में 150 रन की शानदार पारी खेली और रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़ते हुए टेस्ट इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए।
ड्रेसिंग रूम में सब कुछ ठीक नहीं?
गावस्कर ने यह भी आशंका जताई कि टीम के अंदर चयन को लेकर मतभेद हो सकते हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से छुपाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि सब कुछ ठीक-ठाक दिखाने के लिए ये बातें शायद सामने न आएं। लेकिन सच यही है कि कप्तान जिम्मेदार होता है। उसे ही टीम का नेतृत्व करना होता है।"
कोच और कप्तान की भूमिका में फर्क
अपने कप्तानी कार्यकाल को याद करते हुए गावस्कर ने बताया कि उनके समय में कोच की कोई भूमिका नहीं होती थी। टीम मैनेजर और सहायक मैनेजर ही मार्गदर्शन करते थे। उन्होंने कहा, "हमारे पास कोच नहीं थे। सिर्फ पूर्व खिलाड़ी ही मैनेजर के रूप में साथ होते थे जो सलाह देते थे। कप्तान ही सब कुछ तय करता था।"
ऑलराउंडरों के चयन पर भी सवाल
भारत ने मौजूदा सीरीज में शारदुल ठाकुर और नितीश कुमार रेड्डी को तरजीह दी है, लेकिन दोनों का गेंद और बल्ले से योगदान सीमित रहा है। शारदुल ने तीन पारियों में सिर्फ 27 ओवर डालकर दो विकेट लिए हैं, वहीं रेड्डी ने दो मैच में 28 ओवर में दो विकेट चटकाए हैं। बल्लेबाजी में भी दोनों ने खास योगदान नहीं दिया।
(भाषा)
