‘BCCI RTI एक्ट के दायरे में नहीं’, CIC ने दी सलाह, कहा- सरकार का थोपा गया नियंत्रण बिगाड़ सकता है ढांचा

सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन ने फैसला सुनाया है कि बीसीसीआई RTI एक्ट के तहत नहीं आता है। साथ ही नेशनल रिप्रेजेंटेशन और प्लेयर सिलेक्शन के बारे में जानकारी मांगने वाली अपील खारिज कर दी। CIC ने कहा कि सरकारी निगरानी बढ़ने से BCCI के बैलेंस्ड इकोनॉमिक स्ट्रक्चर में रुकावट आ सकती है। इसकी फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस और मार्केट-ड्रिवन ऑपरेशन, खासकर IPL की सफलता का हवाला दिया।

सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने सोमवार को अपने 2018 के ऑर्डर को पलट दिया और कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) एक्ट के दायरे में नहीं आता है। कमीशन ने 2017 में मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स के सामने फाइल की गई एक अपील खारिज कर दी, जिसमें उन प्रोविजन्स/गाइडलाइन्स के बारे में जानकारी मांगी गई थी, जिनके तहत BCCI भारत को रिप्रेजेंट करता है और नेशनल और इंटरनेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट्स के लिए प्लेयर्स को चुनता है और भारत सरकार द्वारा BCCI को दिए गए अधिकार के बारे में भी सवाल उठाए थे।

BCCI

सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, CIC ने ऑर्डर यह भी कहा कि यह मानना सही नहीं है कि सरकारी निगरानी बढ़ने से BCCI का कामकाज बेहतर होता है। इसने चेतावनी दी कि सरकारी कंट्रोल से 'एक बैलेंस्ड इकोनॉमिक स्ट्रक्चर में रुकावट' आ सकती है। कमीशन ने यह भी बताया कि स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन में ट्रांसपेरेंसी के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई, जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सुधार सिफारिशें सिर्फ सलाह देने वाली थीं और “RTI एक्ट के सेक्शन 2(h) में दिए गए साफ कानूनी ढांचे को ओवरराइड नहीं कर सकतीं।

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