कीमियागर (Alchemist), इस शब्द से आपका पाला कभी ना कभी पड़ा ही होगा। अगर नहीं पड़ा तो आज पड़ गया। 'कीमियागर' का शाब्दिक मतलब यूं तो यह होता है कि वह व्यक्ति या शख्स, जो साधारण से दिखने वाले धातुओं को सोने में बदलने की प्राचीन कला में निपुण हो। आसान भाषा में समझें तो बहुत कुशल व्यक्ति। अब अगर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 'कीमियागर' को ढूंढ़े तो कई नाम सामने आएंगे, जिन्होंने अपनी दूरदर्शी निगाहों से खिलाड़ियों की काबिलियत परखी और उसे ऐसा निखारा कि उसकी चमक से पूरा क्रिकेट जगत अचंभित रह गया।
रमाकांत आचरेकर, दिनेश लाड और राहुल द्रविड़ (कोच के रूप में) जैसे दिग्गजों ने अपने-अपने समय में ऐसे कई युवा खिलाड़ियों को तराशा, जो क्रिकेट आइकन बन गए। इन्हीं में एक नाम चंद्रकांत पंडित का भी है। 'खड़ूस कोच और चंदू सर' के नाम से फेमस चंद्रकांत पंडित ने मध्य प्रदेश टीम की काया पलटकर रख दी। साथ ही साथ खिलाड़ियों का ऐसा निखारा कि घरेलू क्रिकेट में उनका डंका बजने लगा। सारांश जैन इसके ताजा उदाहरण हैं। क्योंकि जैन का चयन श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया की टेस्ट टीम में हुआ है।
पारखी नजर ने पहचानी काबिलियत
एक समय था जब सारांश मध्यप्रदेश में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब साल 2020 में चंद्रकांत पंडित मध्यप्रदेश क्रिकेट टीम के हेड कोच बने। जब उन्होंने पहली बार सारांश जैन को बॉलिंग करते हुए देखा तो वह जैन की लूप, ड्रिफ्ट, एक्यूरेसी, टर्न और बॉल को फ्लाइट करने की निडरता जैसी बॉलिंग क्वालिटी देखकर हैरान रह गए। वह सारांश के पास गए और कहा,' तुम एक दिन इंडिया के लिए खेलोगे।' ये वो भविष्यवाणी थी जब सारांश को खुद अपने ऊपर भारोसा नहीं था। कोच की बात पर जैन का जवाब था कि वह मध्य प्रदेश टीम में भी रेगुलर नहीं हैं, इंडिया टीम में तो बिल्कुल नहीं। लेकिन चंद्रकांत ने अपनी पारखी नजर से सारांश को पढ़ लिया था।
सारांश जैन के आंकड़े।
पलट दी किस्मत
अपने अनोखे कोचिंग तरीकों के लिए फेमस चंद्रकांत पंडित ने सारांश जैन की काया पलट दी। सारांश पहले ओवर द विकेट गेंदबाजी करते थे। कोच की सलाह पर उन्होंने एंगल बदला और राउंड द विकेट गेंदबाजी करनी शुरू की। इसका रिजल्ट भी दिखा। इसके बाद वह टीम के रेगुलर सदस्य बन गए और साल 2021-22 के घरेलू सीजन में जैन ने उम्दा प्रदर्शन किया। साल 2022 में जब मध्य प्रदेश ने अपना पहला रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता, तब सारांश ने खास मैचों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तीन मैचों में 13 विकेट लिए और 105 रन बनाए। मुंबई के खिलाफ फाइनल मैच में मध्यप्रदेश की पहली पारी के दौरान 57 रन की पारी खेली और दो विकेट चटकाए।
चंद्रकांत की कोचिंग में छोड़ी छाप
चंद्रकांत के टीम संभालने के बाद सारांश जैन ने उनकी कोचिंग में 33 मैच खेले। इससे पहले, उन्होंने पांच सीजन में सिर्फ 8 मैच खेले थे। मुंबई के खिलाफ फाइनल में किए उनके प्रदर्शन के बाद वह अब मध्य प्रदेश टीम के रेगुलर सदस्य बन गए हैं। चंद्रकांत पंडित ने सारांश की काबिलियत को दुनिया के सामने लगा दिया। बिना आईपीएल खेले आज उनका चयन भारतीय टेस्ट टीम में हो गया। श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच खेलने के लिए वह टीम के साथ दौरे पर जाएंगे। साल 2014 में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने वाले सारांश ने 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 31.75 के औसत से 2,223 रन बनाए हैं, जिसमें दो शतक शामिल हैं। वहीं, 27.3 के औसत से 188 विकेट लिए हैं।
बना दिया है खास रिकॉर्ड
उनका सबसे शानदार डोमेस्टिक सीजन पिछले रणजी ट्रॉफी एडिशन में आया। जब उन्होंने सात मैचों में 518 रन बनाए और 30 विकेट चटकाए। शार्दुल ठाकुर के बाद पिछले पांच रणजी एडिशन में 500 रन और 30 विकेट का अनोखा डबल हासिल करने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए। हाल ही में श्रीलंका में इंडिया A सीरीज के दौरान उन्होंने 75 रन की पारी खेलकर और 7 विकेट लेकर सबको प्रभावित किया।
चयन पर जताई खुशी
सारांश के चयन पर क्रिकबज से बात करते हुए चंद्रकांत पंडित ने कहा, जब मैंने टीम संभाली थी, तब वह रेगुलर नहीं थे, लेकिन उनकी कंसिस्टेंसी देखकर मैं हैरान था। मैंने उनसे यह कहा भी था कि वह इंडिया के लिए सही हैं और यह पक्का किया कि वह रेगुलर खेलें। कुमार कार्तिकेय और सारांश अब टीम के लिए अहम खिलाड़ी हैं। और इस बात की खुशी है कि मेरा कहा सच हुआ।
Saransh Jain With India A. फोटो- BCCI Domestic
सच हुई भविष्यवाणी
पंडित इस बात से खुश हैं कि उनकी भविष्यवाणी सच हुई। साथ ही वे इस बात से भी खास तौर पर खुश हैं कि जैन को IPL में खेलने से पहले ही भारत के लिए चुन लिया गया। उन्होंने कहा, सिलेक्टर्स ने एक खिलाड़ी को सिर्फ उसके रेड-बॉल परफॉर्मेंस के लिए पहचान देकर एक अच्छा उदाहरण पेश किया है। यह खिलाड़ियों को व्हाइट-बॉल क्रिकेट जितना ही रेड-बॉल क्रिकेट पर भी फोकस करने के लिए मोटिवेट कर सकता है।
पहले टेस्ट मैच में डेब्यू की उम्मीद
सारांश जैन शायद अकेले ऐसे ऑफ-स्पिनर हैं जो रेगुलर तौर पर राउंड द विकेट से बॉलिंग करते हैं। वह अपना स्पेल उसी एंगल से शुरू करते हैं। सारांश दोनों एंगल से गेंदबाजी कर सकने में माहिर हो गए हैं। ऑफ-स्पिनिंग ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सारांश जैन टीम में अकेले दूसरे ऑफ स्पिनर हैं और श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली पिच पर सारांश के खेलने की संभावना बढ़ जाती है। चंद्रकांत पंडित को उम्मीद है कि जैन पहले टेस्ट के लिए प्लेइंग इलेवन का हिस्सा होंगे।
