New Year 2023: नववर्ष उर्जाओं के संचारण का नया वर्ष। बस द्वार पर दस्तक दे रहा है 2023। हां बेशक कैलेंडर बदलेगा, महीना बदलेगा लेकिन सर्दी की चादर लपेटे आया वक्त नयी सोच को भी संग लेकर आएगा। सनातन धर्म में किसी भी नये कार्य का आरंभ दैवीय उर्जाओं के आह्वान से करते हैं। फिर नये वर्ष का स्वागत क्यों न इसी तरह किया जाए। 31 दिसंबर की रात जाते हुए वर्ष को गीत संगीत के साथ विदा तो कर दिया जाता है लेकिन नये वर्ष के स्वागत के समय ठीक 12 बजे एक मदहोशी सी छा जाती है। ये मदहोशी इतनी अधिक होती है कि लोग अक्सर कर एक जनवरी यानी वर्ष के पहले दिन देर तक सोते ही रहते है। जबकि होना तो ये चाहिए कि नये वर्ष का आरंभ सूर्योदय को प्रणाम करके करें। इसके अलावा कुछ एेसे उपाय हैं जिन्हें नववर्ष के पहले दिन करने से पूरे वर्ष नवउर्जा का मन मस्तिष्क में संचार रहता है। आधुनिक एस्ट्रो एवं वास्तुविद् दीप्ति जैन के सुझाए कुछ उपाय...
नववर्ष मनाएं वैदिक रीति से
सूर्य नमस्कार के करें दिन का आरंभ
यूं तो एक जनवरी की सुबह घने कोहरे और ठिठुरन भरी सर्दी से होती है। लोग देर तक सोना चाहते हैं। लेकिन यदि थाेड़ी सी हिम्मत करके जल्दी जाग जाएं। ब्रह्ममुहूर्त में न सही लेकिन सूर्यादय के समय जागकर उन्हें प्रणाम करें तो मन में नवउर्जा का संचार होता है। सूर्यदेव को प्रणाम कर भावी वर्ष के मंगलमय रहने की प्रार्थना करें।
घंटी की ध्वनि और शंखनाद करें
स्नान ध्यान करने के बाद घर के हर कोने में घंटी की ध्वनि जरूर करें। इसके अलावा शंखनाद करें। इससे नकारात्मक उर्जाएं समाप्त होती हैं और सकारात्मक सोच के साथ उर्जाओं का प्रवाह घर में होता है।
गंगाजल से करें छिड़काव
गंगाजल पवित्रता का दूसरा नाम माना जाता है। हर घर में गंगाजल रहता है। एक पात्र में गंगाजल लेकर फूल के द्वारा उसका छिड़काव पूरे घर में करें।
फूलों से सजाएं घर
फूल क्योंकि स्वतः ही उर्जा देते हैं। सुगंधित और रंग बिरंगे फूल के देखकर ही मन को उत्साहित करते हैं। घर के मंदिर से लेकर दरवाजे तक को यदि फूलों से सजाएंगे तो नववर्ष का उल्लास दोगुना हो जाएगा।
परिवार सहित करें आरती
संगठित परिवार में अपने आप में शक्ति होती है। परिवार के अलग अलग सदस्यों की उर्जाएं जब संगठित होती हैं तो सकारात्मकता और बढ़ती है। वर्ष के पहले दिन पूरे परिवार के साथ भगवान की आरती अवश्य करें। आरती घी के दीपक के साथ ही कपूर से भी करें।
शाम को करें दीपदान
दीपदान करना सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। यदि हवन यज्ञ न कर पाएं तो दीपदान कर सकते हैं। गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ 11 या 21 दीपक जलाएं। कम से कम 108 गायत्री मंत्र का उच्चारण अवश्य करें। इसके बाद परिवार सहित मंदिर जाएं।
डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
