भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक खास समारोह में ‘सिंग, डांस एंड लीड: लीडरशिप लेसन्स फ्रॉम द लाइफ ऑफ श्रील प्रभुपाद’ किताब का विमोचन किया। यह किताब इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद के अनोखे लीडरशिप और आध्यात्मिक विरासत पर केंद्रित है। इसके लेखक प्रोफेसर (डॉ.) हिंडोल सेनगुप्ता हैं और इस बुक का प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किया है।
उपराष्ट्रपति ने किया पुस्तक का विमोचन
‘सिंग, डांस एंड लीड’ बुक श्रील प्रभुपाद को आज के समय के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक लीडर्स में से एक के रूप में पेश करती है। किताब में उनकी लीडरशिप के सिद्धांतों को आम मैनेजमेंट नियमों के साथ जोड़कर पेश किया गया है, जो सेवा, अनुशासन, मूल्यों और खुशी पर आधारित हैं। इस बुक के लेखक की मानें तो उन्होंने पहली बार श्रील प्रभुपाद की गुरु-शिष्य परंपरा को लीडरशिप ट्रेनिंग के स्रोत के रूप में सामने लाया है।
यह किताब ‘सिंग, डांस एंड प्रे’ का अगला हिस्सा है, जो श्रील प्रभुपाद की जीवनी पर थी। नई किताब हर उम्र के लोगों के लिए उपयोगी है, खासकर युवा लीडरों के लिए, जो आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित मैनेजमेंट स्टाइल सीखना चाहते हैं। श्रील प्रभुपाद ने 70 साल की उम्र में दुनिया भर में आध्यात्मिक क्रांति शुरू की, जो आज इस्कॉन और अक्षय पात्र फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के जरिए जारी है।
इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति के साथ-साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इस्कॉन बेंगलुरु के अध्यक्ष मधु पंडित दास और वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंचलपति दास ने की। देशभर से आए नामी नेता, विचारक और प्रभावशाली लोग इस मौके पर शामिल हुए।
आध्यात्मिक प्रेरणा का दूसरा नाम है अक्षय पात्र फाउंडेशन
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ‘यह किताब लीडरशिप को ताकत के बजाय सेवा और मूल्यों पर आधारित जीवन शैली के रूप में देखने का मौका देती है। श्रील प्रभुपाद का जीवन साबित करता है कि कोशिश और मूल्य कभी देर नहीं करते।’ उन्होंने अक्षय पात्र फाउंडेशन की 5 अरब भोजन परोसने की उपलब्धि की तारीफ की और इसे आध्यात्मिक प्रेरणा का जीता-जागता उदाहरण बताया।
वहीं, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किताब को लीडरशिप की नई परिभाषा बताते हुए कहा कि श्रील प्रभुपाद का जीवन अंदर की आवाज से प्रेरित लीडरशिप का सबसे अच्छा उदाहरण है। उन्होंने इस्कॉन की वैश्विक पहलों की सराहना की। मधु पंडित दास ने उपराष्ट्रपति और मंत्री का शुक्रिया अदा करते हुए किताब को युवाओं के लिए जरूरी पढ़ाई बताया। लेखक प्रो. हिंडोल सेनगुप्ता ने इसे भारतीय धार्मिक-दार्शनिक ज्ञान और आधुनिक लीडरशिप का पुल बताया।
किताब की हुई खूब सराहना
इस किताब को इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति, बायोकॉन की डॉ. किरण मजूमदार-शॉ, ग्रैमी विजेता चंद्रिका टंडन, कैम्ब्रिज के प्रो. जयदीप प्रभु और मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जैसी बड़ी हस्तियों से खूब प्रशंसा मिली है। यह किताब न सिर्फ आध्यात्मिक दुनिया बल्कि मैनेजमेंट और लीडरशिप के क्षेत्र में भी नया नजरिया देती है। श्रील प्रभुपाद की शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को प्रेरित कर रही हैं, और यह किताब उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
