एकादशी या द्वादशी पर नहीं कर पाएं हैं तुलसी विवाह तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन संपन्न करें ये शुभ काम, जान लें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
तुलसी विवाह के दिन शालिग्राम भगवान का विवाह तुलसी माता से कराया जाता है। कहते हैं तुलसी विवाह कराने से वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। यहां आप जानेंगे तुलसी विवाह की तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।
एकादशी या द्वादशी पर नहीं कर पाएं हैं तुलसी विवाह तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन संपन्न करें ये शुभ काम, जान लें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Tulsi Vivah Aarti Lyrics
कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 2024 (Tulsi Vivah Shubh Muhurat On Kartik Purnima 2024)
कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी विवाह कराने का शुभ मुहूर्त 15 नवंबर 2024 की शाम 5 बजकर 10 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं कुछ लोग इस दिन सुबह-सुबह भी तुलसी विवाह कराते हैं।
तुलसी विवाह की पूजन विधि (Tulsi Vivah Puja Samagri)
तुलसी विवाह के लाभ (Tulsi Vivah Benefits)
धार्मिक मान्यताओं अनुसार तुलसी विवाह कराने से परिवार में सुख-शांति आती है। साथ ही परिवार की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इतना ही नहीं तुलसी विवाह कराने से दुर्भाग्य से भी छुटकारा मिलता है। अविवाहित लड़कियों को तुलसी विवाह कराने से मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।
तुलसी विवाह कितने दिनों तक कर सकते हैं (Tulsi Vivah Kab Kab Kara Sakte Hai)
तुलसी विवाह वैसे तो कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को कराया जाता है लेकिन भारत में कुछ जगहों पर पांच दिनों तक तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से होती है और इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा को होता है।
तुलसी जी के मंत्र (Tulsi Ji Ke Mantra)
महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी माता की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti)
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
धन तुलसी पूरण तप कीनो,
शालिग्राम बनी पटरानी ।
जाके पत्र मंजरी कोमल,
श्रीपति कमल चरण लपटानी
धूप-दीप-नवैद्य आरती,
पुष्पन की वर्षा बरसानी ।
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,
बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥
सभी सखी मैया तेरो यश गावें,
भक्तिदान दीजै महारानी ।
नमो-नमो तुलसी महारानी,
तुलसी महारानी नमो-नमो ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो।
तुलसी विवाह सामग्री लिस्ट
तुलसी विवाह के भजन (Tulsi Vivah Bhajan)
सजके आयेंगे दूल्हे राजा।
देखो देवता बजायेंगे बाजा...
सोलह सिंगार मेरी तुलसा करेंगी।
हल्दी चढ़ेगी मांग भरेगी...
देखो होठों पे झूलेगी नथनियां।
देखो देवता...
देवियां भी आई और देवता भी आए।
साधु भी आए और संत भी आए...
और आई है संग में बरातिया।
देखो देवता...
गोरे-गोरे हाथों में मेहंदी लगेगी...
चूड़ी खनकेगी ,वरमाला सजेगी।
प्रभु के गले में डालेंगी वरमाला।
देखो देवता...
लाल-लाल चुनरी में तुलसी सजेगी...
आगे-आगे प्रभु जी पीछे तुलसा चलेगी।
देखो पैरो में बजेगी पायलियां।
देखो देवता...
सज धज के मेरी तुलसा खड़ी है...
डोली मंगवा दो बड़ी शुभ घड़ी है।
देखो आंखों से बहेगी जलधारा।
देखो देवता...
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तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Ki Aarti)
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
सब योगों से ऊपर,
सब रोगों से ऊपर ।
रज से रक्ष करके,
सबकी भव त्राता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
बटु पुत्री है श्यामा,
सूर बल्ली है ग्राम्या ।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,
सो नर तर जाता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
हरि के शीश विराजत,
त्रिभुवन से हो वंदित ।
पतित जनों की तारिणी,
तुम हो विख्याता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
लेकर जन्म विजन में,
आई दिव्य भवन में ।
मानव लोक तुम्हीं से,
सुख-संपति पाता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
हरि को तुम अति प्यारी,
श्याम वर्ण सुकुमारी ।
प्रेम अजब है उनका,
तुमसे कैसा नाता ॥
हमारी विपद हरो तुम,
कृपा करो माता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
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Tulsi Vivah Me Kya- Kya Chadaya Jata Hai (तुलसी विवाह में क्या- क्या चढ़ाया जाता है)
बिंदी
मेंहदी
चुनरी
हल्दी की गांठ
केले के पत्ते
चूड़ी
साड़ी
आलता
केसर
अक्षत
कमलगट्टा
Tulsi vivah geet: तुलसी विवाह गीत लिरिक्स
सजके आयेंगे दूल्हे राजा।
देखो देवता बजायेंगे बाजा...
सोलह सिंगार मेरी तुलसा करेंगी।
हल्दी चढ़ेगी मांग भरेगी...
देखो होठों पे झूलेगी नथनियां।
देखो देवता...
देवियां भी आई और देवता भी आए।
साधु भी आए और संत भी आए...
और आई है संग में बरातिया।
देखो देवता...
गोरे-गोरे हाथों में मेहंदी लगेगी...
चूड़ी खनकेगी ,वरमाला सजेगी।
प्रभु के गले में डालेंगी वरमाला।
देखो देवता...
लाल-लाल चुनरी में तुलसी सजेगी...
आगे-आगे प्रभु जी पीछे तुलसा चलेगी।
देखो पैरो में बजेगी पायलियां।
देखो देवता...
सज धज के मेरी तुलसा खड़ी है...
डोली मंगवा दो बड़ी शुभ घड़ी है।
देखो आंखों से बहेगी जलधारा।
देखो देवता...
Tulsi lagane vidhi: तुलसी लगाने की विधि
Can we eat non veg on tulsi vivah: तुलसी विवाह के दिन नॉनवेज खा सकते हैं
Tulsi vivah benefit: तुलसी विवाह के लाभ
तुलसी विवाह भोग लिस्ट : Tulsi Vivah Bhog List
-कच्चा दूध
-फल
-तुलसी के पत्ते
-केसर की खीर
-सकरकंद का भोग
Tulsi Vivah Katha: तुलसी विवाह कथा
जिसके बाद वृंदा ने भगवान विष्णु का श्राप विमोचन किया और स्वयं अपने पति का कटा हुआ सिर लेकर सती हो गई। कहते हैं जिस जगह पर वृंदा सती हुई थीं उनकी राख से वहां एक पौधा निकला, जिसे भगवान विष्णु ने “तुलसी” नाम दिया और साथ ही ये भी कहा कि “शालिग्राम” नाम से मेरा एक रूप इस पत्थर में रहेगा। जिसकी पूजा हमेशा तुलसी जी के साथ ही की जाएगी। साथ ही भगवान ने तुलसी को ये भी वरदान दिया कि मैं बिना तुलसी के भोग तक स्वीकार नहीं करुंगा। कहते हैं तब से ही तुलसी जी की पूजा शुरू हो गई और कार्तिक मास में उनका विवाह शालिग्राम जी के साथ कराया जाने लगा।
सत्यनारायण जी की आरती (Satyanarayan Ji Ki Aarti)
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
रत्न जडि़त सिंहासन, अद्भुत छवि राजै ।
नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजै ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो ।
बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी ।
चन्द्रचूड़ एक राजा, तिनकी विपत्ति हरी ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही ।
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर-स्तुति कीन्हीं ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो ।
श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सरयो ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
ग्वाल-बाल संग राजा, वन में भक्ति करी ।
मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयाल हरी ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल, मेवा ।
धूप दीप तुलसी से, राजी सत्यदेवा ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावै ।
ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति, सहज रूप पावे ॥
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥
Tulsi Vivah Mangalashtak Marathu Lyrics: तुळशी विवाह मंगलाष्टके
बल्लाळो मुरुडं विनायकमहं, चिन्तामणि स्थेवरं ||
लेण्याद्रिं गिरिजात्मकं सुरवरदं, विघ्नेश्वरम् ओज़रम् |
ग्रामे रांजण संस्थितम् गणपतिः, कुर्यात् सदा मंगलम || १ ||
गंगा सिंधु सरस्वती च यमुना, गोदावरी नर्मदा ।
कावेरी शरयू महेंद्रतनया शर्मण्वती वेदिका ।।
क्षिप्रा वेत्रवती महासुर नदी, ख्याता गया गंडकी ।
पूर्णा पूर्ण जलैः समुद्र सरिता, कुर्यातसदा मंगलम ।। २ ।।
लक्ष्मी: कौस्तुभ पारिजातक सुरा धन्वंतरिश्चंद्रमा: ।
गाव: कामदुधाः सुरेश्वर गजो, रंभादिदेवांगनाः ।।
अश्वः सप्त मुखोविषम हरिधनुं, शंखोमृतम चांबुधे ।
रत्नानीह चतुर्दश प्रतिदीनम, कुर्वंतु वोमंगलम ।। ३ ।।
राजा भीमक रुख्मिणीस नयनी, देखोनी चिंता करी ।
ही कन्या सगुणा वरा नृपवरा, कवणासि म्यां देईजे ।।
आतां एक विचार कृष्ण नवरा, त्यासी समर्पू म्हणे ।
रुख्मी पुत्र वडील त्यासि पुसणे, कुर्यात सदा मंगलम ।। ४ ।।
लक्ष्मीः कौस्तुभ पांचजन्य धनु हे, अंगीकारी श्रीहरी ।
रंभा कुंजर पारिजातक सुधा, देवेंद्र हे आवरी ।।
दैत्यां प्राप्ति सुरा विधू विष हरा, उच्चैःश्रवा भास्करा ।
धेनुवैद्य वधू वराशि चवदा, कुर्यात सदा मंगलम ।। ५ ।।
लाभो संतति संपदा बहु तुम्हां, लाभोतही सद्गुण ।
साधोनि स्थिर कर्मयोग अपुल्या, व्हा बांधवां भूषण ।।
सारे राष्ट्र्धुरीण हेचि कथिती कीर्ती करा उज्ज्वल ।
गा गार्हस्थाश्रम हा तुम्हां वधुवऱां देवो सदा मंगलम ।। ६ ।।
विष्णूला कमला शिवासि गिरिजा, कृष्णा जशी रुख्मिणी ।
सिंधूला सरिता तरुसि लतिका, चंद्रा जशी रोहिणी ।।
रामासी जनकात्मजा प्रिय जशी, सावित्री सत्यव्रता ।
तैशी ही वधू साजिरी वरितसे, हर्षे वरासी आतां ।। ७।।
आली लग्नघडी समीप नवरा घेऊनि यावा घरा ।
गृह्योत्के मधुपर्कपूजन करा अन्तःपटाते धारा ।।
दृष्टादृष्ट वधुवरा न करितां, दोघे करावी उभी ।
वाजंत्रे बहु गलबला न करणे, लक्ष्मीपते मंगलम ।। ८ ।।
तुलसी विवाह की सरल विधि
Tulsi Vivah Benefits: तुलसी विवाह से मिलने वाले शुभ फल
तुलसी मंगलाष्टक पाठ
चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः।
प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः,
स्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
गंगा गोमतिगोपतिगर्णपतिः, गोविन्दगोवधर्नौ,
गीता गोमयगोरजौ गिरिसुता, गंगाधरो गौतमः।
गायत्री गरुडो गदाधरगया, गम्भीरगोदावरी,
गन्धवर्ग्रहगोपगोकुलधराः, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
नेत्राणां त्रितयं महत्पशुपतेः अग्नेस्तु पादत्रयं,
तत्तद्विष्णुपदत्रयं त्रिभुवने, ख्यातं च रामत्रयम्।
गंगावाहपथत्रयं सुविमलं, वेदत्रयं ब्राह्मणम्,
संध्यानां त्रितयं द्विजैरभिमतं, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
बाल्मीकिः सनकः सनन्दनमुनिः, व्यासोवसिष्ठो भृगुः,
जाबालिजर्मदग्निरत्रिजनकौ, गर्गोऽ गिरा गौतमः।
मान्धाता भरतो नृपश्च सगरो, धन्यो दिलीपो नलः,
पुण्यो धमर्सुतो ययातिनहुषौ, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
गौरी श्रीकुलदेवता च सुभगा, कद्रूसुपणार्शिवाः,
सावित्री च सरस्वती च सुरभिः, सत्यव्रतारुन्धती।
स्वाहा जाम्बवती च रुक्मभगिनी, दुःस्वप्नविध्वंसिनी,
वेला चाम्बुनिधेः समीनमकरा, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
गंगा सिन्धु सरस्वती च यमुना, गोदावरी नमर्दा,
कावेरी सरयू महेन्द्रतनया, चमर्ण्वती वेदिका।
शिप्रा वेत्रवती महासुरनदी, ख्याता च या गण्डकी,
पूर्णाः पुण्यजलैः समुद्रसहिताः, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
लक्ष्मीः कौस्तुभपारिजातकसुरा, धन्वन्तरिश्चन्द्रमा,
गावः कामदुघाः सुरेश्वरगजो, रम्भादिदेवांगनाः।
अश्वः सप्तमुखः सुधा हरिधनुः, शंखो विषं चाम्बुधे,
रतनानीति चतुदर्श प्रतिदिनं, कुवर्न्तु वो मंगलम।।
ब्रह्मा वेदपतिः शिवः पशुपतिः, सूयोर् ग्रहाणां पतिः,
शुक्रो देवपतिनर्लो नरपतिः, स्कन्दश्च सेनापतिः।
विष्णुयर्ज्ञपतियर्मः पितृपतिः, तारापतिश्चन्द्रमा,
इत्येते पतयस्सुपणर्सहिताः, कुवर्न्तु वो मंगलम्।।
