तरावीह की नमाज क्या है, तरावीह की नमाज कैसे पढ़ते हैं, जानें तरावीह की नमाज की दुआ- नियत- फजीलत और इसे पढ़ने का तरीका

रमजान में हर दिन पांच वक्त की नमाज अदा करने के अलावा तरावीह की नमाज भी पढ़ी जाती है। यहां से आप जानें की तरावीह की नमाज क्या है, तरावीह की नमाज को कैसे पढ़ा जाता है। साथ ही तरावीह की नमाज की दुआ, तरावीह की नमाज की नियत, तरावीह की नमाज की फजीलत और साथ ही इसे पढ़ने का तरीका भी यहां बताया गया है।

इस्लाम धर्म में हर मुसलमान को पांच वक्त की नमाज पढ़ना जरूरी माना गया है। खासतौर से रमजान के महीने में तो इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाता है। पांच वक्त की नमाज के बाद रमजान में तरावीह की नमाज जरूर पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज दो तरीके से की जाती है। बड़ी तरावीह की नमाज में इमाम रमजान के रोजे के अंदर पूरा कुरान शरीफ को मुक्कमल करता है तो वहीं छोटी तरावीह की नमाज में इमाम कुरान के 30 वे पारे की 10 सूरत पढ़ते हैं। तरावीह की नमाज क्या है, इसे कैसे पढ़ते हैं और तरावीह की नमाज पढ़ने का सही तरीका क्या है, इसकी पूरी जानकारी यहां है। तरावीह की नमाज की दुआ, नियत और फजीलत भी यहां मौजूद है।

तरावीह की नमाज की दुआ, नियत, फजीलत और पढ़ने का तरीका (pc: canva)

तरावीह की नमाज क्या है?

तरावीह अरबी भाषा का शब्द है जिसका मतलब है आराम और तेहेरना। रमजान में इस नमाज को पढ़ने का विशेष महत्व माना जाता है। तरावीह की नमाज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है, जिसमें कुल 20 रकात होती हैं और हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। वहीं हर बार 4 रकात के बाद तरावीह की दुआ पढ़ी जाती है। इस दुआ में सभी नमाज़ी अपने चाहने वालों की सलामती की दुआ करते हैं। यह नमाज महिला और पुरुष दोनों के लिए जरूरी है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में तरावीह की नमाज़ होती है वहां बरकत ही बरकत होती है।

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