Surya Grahan 2026 For Pregnant Women: सूर्यग्रहण पर जानिए गर्भवती महिलाओं पर क्या होगा असर?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 17, 2026, 03:34 PM IST
Surya Grahan 2026 For Pregnant Women: इस दौरान गर्भवती महिलाएं घर के अंदर ही रहें, सूर्य को सीधे न देखें, चाकू, कैंची, सुई या धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें, सिलाई-कढ़ाई या काटने-छांटने का काम न करें, शांत रहें और सकारात्मक विचार रखें, भगवान का स्मरण, मंत्र जाप या ध्यान करें। वहीं, कुछ परिवारों में पेट पर तुलसी का पत्ता रखने की परंपरा भी है, लेकिन यह पूरी तरह आस्था पर आधारित है।
सूर्य ग्रहण के समय क्या रखें सावधानियां?
Surya Grahan 2026 Pregnant Women Rules in Hindi: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है। यह ग्रहण फाल्गुन अमावस्या के दिन पड़ रहा है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह ग्रह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। ग्रहण से कुछ समय पहले सूतक काल लग जाता है। वहीं, ग्रहण के समय कई प्रकार की सावधानियों की बात शास्त्रों में बताई गई है। शास्त्रों की मानें तो ग्रहण तब लगता है जब मायावी राहु सूर्य और चंद्रमा को अपना ग्रास बना लेता है।
इस कारण इस समय को बेहद नकारात्मक माना जाता है। जब राहु सूर्य को ग्रास बनाता है तब सूर्यग्रहण और जब चंद्रमा को ग्रास बनाता है तब चंद्रग्रहण लगता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों का खास सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानते हैं कि साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण किस समय लगेगा और यह कहां-कहां दिखाई देगा और कहां नहीं दिखाई देगा?
सूर्य ग्रहण 2026 का समय क्या है?
17 फरवरी 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय (IST) के अनुसार दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से शुरू होगा और शाम 07 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। यानि ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट रहेगी। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। वहीं, चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय एजेंसी NASA के अनुसार यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के देशों में दिखाई देगा।
क्या भारत में दिखाई देगा ग्रहण?
नहीं। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इस कारण धार्मिक मान्यता के अनुसार भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के पट बंद नहीं होंगे और सामान्य पूजा-पाठ जारी रहेगा।
कहां दिखाई देगा यह ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसी NASA के अनुसार यह ग्रहण इन क्षेत्रों में दिखाई देगा। ग्रहण जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया, मॉरीशस, अर्जेंटीना, तंजानिया, चिली और दक्षिण अमेरिका के अन्य हिस्से, दक्षिण अटलांटिक महासागर क्षेत्र, दक्षिणी प्रशांत महासागर, अंटार्कटिका (आंशिक रूप से) इन क्षेत्रों में ग्रहण का प्रत्यक्ष दृश्य अनुभव किया जा सकेगा।
कहां नहीं दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
यह ग्रहण कई देशों में बिल्कुल दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण भारत, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात और अधिकांश एशियाई देश, यूरोप के कई हिस्से, उत्तर अमेरिका के बड़े क्षेत्र, अफ्रीका के मध्य और उत्तरी क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया में नहीं दिखाई देगा। जहां ग्रहण दिखाई नहीं देगा, वहां सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाता है।
जहां यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां गर्भवती महिलाओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। ग्रहण दोपहर 03:26 बजे शुरू होगा, इसलिए जहां यह दृश्य होगा वहां सूतक लगभग सुबह 03:26 बजे से प्रभावी माना जाएगा। धार्मिक रूप से गर्भवती महिलाओं को सूतक लगने के समय से या कम से कम ग्रहण शुरू होने दोपहर 03:26 से लेकर ग्रहण समाप्ति शाम 07:57 तक विशेष सावधानी रखना चाहिए।
धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि ग्रहण काल संवेदनशील समय होता है। इस दौरान गर्भवती महिलाएं घर के अंदर ही रहें, सूर्य को सीधे न देखें, चाकू, कैंची, सुई या धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें, सिलाई-कढ़ाई या काटने-छांटने का काम न करें, शांत रहें और सकारात्मक विचार रखें, भगवान का स्मरण, मंत्र जाप या ध्यान करें। वहीं, कुछ परिवारों में पेट पर तुलसी का पत्ता रखने की परंपरा भी है, लेकिन यह पूरी तरह आस्था पर आधारित है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण समाप्त होते ही स्नान करें। साफ कपड़े पहनें, घर में गंगाजल का छिड़काव करें, सूर्यदेव का स्मरण करें,अगले दिन सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
भारत में क्या गर्भवती महिलाओं को नियम मानना जरूरी है?
17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ग्रहण के नियम उसी स्थान पर लागू होते हैं, जहां ग्रहण दृश्य होता है। इस कारण भारत में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक प्रतिबंध अनिवार्य नहीं माने जाएंगे।
क्या कहता है वैज्ञानिक दृष्टिकोण ?
वैज्ञानिक रूप से सूर्य ग्रहण का गर्भवती महिला या गर्भस्थ शिशु पर कोई प्रमाणित नकारात्मक प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि बिना सुरक्षा चश्मे के सूर्य को सीधे न देखा जाए, क्योंकि इससे आंखों को नुकसान हो सकता है।
