श्री हरि विष्णु के 24 अवतारों में पहला अवतार है मत्स्य अवतार, जानिए क्या है पौराणिक कथा

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 24, 2023, 09:14 PM IST

Story of Avatar: भगवान का अपने नित्य धाम से पृथ्वी पर लीला अवतरण ही अवतार कहा जाता है। नींद के कारण ब्रह्मा जी के मुख से निकले वेदों की रक्षा के लिए लिया था भगवान विष्णु ने पहला अवतार। आइये जानते हैं भगवान के मत्स्य रूप में प्रकट होने की कहानी।

KEY HIGHLIGHTS
  • भगवान श्रीविष्णु के हैं कुल 24 अवतार
  • मत्स्य के रूप में लिया था भगवान ने पहला अवतार
  • वेदों की रक्षा के लिए भगवान ने लिया था ये अवतार


Story of Avatar: श्रीभक्तमाल ग्रंथ के अनुसार भगवान का अपने नित्य धाम से पृथ्वी पर लीला अवतरण ही “अवतार” कहा जाता है। कल्पभेद से भगवान ने अनेक अवतार धारणकर अपने लीला चरित्र से संतजन−परित्राण, दुष्टदलन और धर्मसंस्थापन के कार्य किये हैं। उनके अनंत अवतार हैं, अनंत चरित्र हैं और अनंत लीला कथाएं हैं। भगवान के विशेष 24 अवतारों में से प्रथम अवतार मत्स्य का अवतार यानी एक मछली का अवतार था।

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मत्स्य अवतार

मत्स्य अवतार की कथा

ब्रह्माजी के सोने का जब समय आ गया और उन्हें नींद आने लगी, उस समय वेद उनके मुख से निकल पड़े और उनके पास ही रहने वाले हयग्रीव नाम दैत्य ने उन्हें चुरा लिया। ब्राह्म नामक नैमित्तिक प्रलय होने से सारे लोक समुद्र में डूब गए। श्रीहरि ने हयग्रीव की चेष्टा जान ली और वेदों का उद्धार करने के लिए मत्स्यावतार ग्रहण किया।

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