Shivratri Vrat Kaise Karein: सावन शिवरात्रि का व्रत पहली बार रखने जा रहे हैं तो मन में कई सवाल आ सकते हैं। व्रत कब शुरू होगा, दिन में क्या खा सकते हैं, शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए और क्या रातभर जागना जरूरी है? वास्तव में शिवरात्रि का व्रत बहुत कठिन नियमों से अधिक श्रद्धा और संयम का पर्व है। आप अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हुए भी भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं। जरूरी यह है कि व्रत केवल भोजन छोड़ने तक सीमित न रहे, बल्कि उस दिन मन और व्यवहार में भी थोड़ा ठहराव आए।
सावन शिवरात्रि व्रत विधि
शिवरात्रि व्रत की शुरुआत संकल्प से करें
शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें। हाथ में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें। आप अपनी भाषा में भी कह सकते हैं कि आज का व्रत श्रद्धापूर्वक रखेंगे और अगले दिन पूजा के बाद इसका पारण करेंगे।
संकल्प लेते समय अपनी किसी इच्छा का उल्लेख किया जा सकता है, लेकिन शिवजी से केवल मांगना ही जरूरी नहीं। परिवार की शांति, स्वास्थ्य या सही निर्णय लेने की शक्ति की प्रार्थना भी इस व्रत को व्यक्तिगत अर्थ देती है।
शिवरात्रि के व्रत में क्या खा सकते हैं
कई श्रद्धालु शिवरात्रि पर निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फलाहार में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना और सेंधा नमक से बना भोजन लिया जा सकता है। अनाज, सामान्य नमक, दाल और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि निर्जला उपवास करना हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं है। डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था या किसी पुरानी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार फलाहार करें। कोई भी व्रत ये नहीं कहता है कि आप दवा छोड़कर या शरीर को नुकसान पहुंचाकर उपवास करें।
शिवरात्रि व्रत में घर पर कैसे करें शिवजी की पूजा
पूजा शुरू करने से पहले शिवलिंग या शिवजी की प्रतिमा के पास दीपक जलाएं। सबसे पहले जल या गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार दूध, दही, शहद या पंचामृत अर्पित कर सकते हैं। आखिर में दोबारा साफ जल चढ़ाएं।
शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन, धतूरा और फल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह कटा-फटा न हो और उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे। पूजा में बहुत अधिक सामग्री न हो तो केवल जल, बेलपत्र और सच्चे मन से बोला गया ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र भी पर्याप्त माना जाता है।
क्या चारों प्रहर की पूजा जरूरी है
शिवरात्रि की रात चार प्रहर में पूजन की परंपरा है। जो लोग पूरा रात्रि जागरण कर सकते हैं, वे हर प्रहर शिवजी का अभिषेक और मंत्र जाप कर सकते हैं। अलग-अलग प्रहर में जल, दही, घी और शहद से अभिषेक करने की परंपरा भी मिलती है। हालांकि घर में सभी के लिए चार बार विधिवत पूजा करना संभव न हो तो रात्रि में एक बार शांत मन से शिव पूजन किया जा सकता है।
रात को शिव चालीसा, शिव कथा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। जागरण का अर्थ केवल रातभर जागते रहना नहीं, बल्कि अपनी चेतना को आलस्य, क्रोध और नकारात्मक विचारों से जगाना भी है।
सावन शिवरात्रि व्रत का पारण कैसे करें
अगले दिन स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद निर्धारित पारण अवधि में व्रत खोलें। शुरुआत पानी, फल या हल्के सात्विक भोजन से करना बेहतर रहता है। व्रत पूरा होने पर जरूरतमंद को भोजन, फल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान भी दिया जा सकता है।
