Masik Karthigai 2026 Today Shubh Muhurat & Puja Vidhi: सावन का पवित्र महीना चल रहा है, जिसमें विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस बीच उनके पुत्र कार्तिकेय जी को समर्पित मासिक कार्तिगाई पड़ रही है। द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, हर महीने मासिक कार्तिगाई कृतिका नक्षत्र के दिन मनाई जाती है। इस बार आज 7 अगस्त 2026, वार शुक्रवार को प्रात: काल से ही कृत्तिका नक्षत्र रहेगा, जो शाम 6 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगा। गौरतलब है कि कल 6 अगस्त की रात 8 बजकर 13 मिनट से कृत्तिका नक्षत्र प्रभावी है। चलिए अब जानें मासिक कार्तिगाई दिन के धार्मिक महत्व, पूजा के शुभ मुहूर्त और विधि आदि के बारे में।
आज मासिक कार्तिगाई पर इस विधि से शुभ मुहूर्त में करें पूजा
मासिक कार्तिगाई क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सत्ययुग में भगवान कार्तिकेय का जन्म कृत्तिका नक्षत्र में हुआ था, जिसके बाद से हर महीने इस नक्षत्र में उनकी पूजा करने की परंपरा शुरू हो गई। भगवान कार्तिकेय शिव जी और माता पार्वती के पुत्र हैं, इसलिए इस दिन उनकी (शिव-शक्ति जी) पूजा करना भी शुभ रहता है। साथ ही घर में दीपक जलाया जाता है। कहा जाता है कि इससे घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का वास होता है। इसके अलावा रोगों और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा पाने के लिए भी विशेष रूप से दीपदान किया जाता है।
मासिक कार्तिगाई के दिन आप घर के मुख्य द्वार, पूजा घर, तुलसी के पौधे के पास और घर के चारों कोनों में गाय के घी का दीपक जला सकते हैं, जो कि मिट्टी या पीतल का होना चाहिए।
मासिक कार्तिगाई की पूजा का शुभ मुहूर्त
| शुभ मुहूर्त के नाम | समय |
| सूर्योदय | सुबह 05:46 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:21 बजे से 05:03 बजे तक |
| प्रातः सन्ध्या | सुबह 04:42 बजे से 05:46 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:40 बजे से 03:34 बजे तक |
| अमृत काल | शाम 04:28 बजे से 05:58 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 07:08 बजे से 07:29 बजे तक |
| सायाह्न सन्ध्या | शाम 07:08 बजे से 08:12 बजे तक |
| निशिता मुहूर्त | रात 12:06 बजे से 12:48 बजे तक (8 अगस्त) |
मासिक कार्तिगाई की पूजा कैसे करें?
आज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद पीले, लाल या सफेद रंग के साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के मंदिर को साफ करें। भगवान कार्तिकेय के साथ-साथ शिव जी और माता पार्वती की संयुक्त मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अब देवी-देवताओं को गंगाजल, चंदन, फल, फूल, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें। घी या तिल के तेल का दीपक जलाने के बाद कार्तिकेय जी के बीज मंत्र 'ॐ शरवणभवाय नमः' का 3, 5, 7, 11 या 108 बार जाप करें। शिव जी और माता पार्वती का स्मरण कर उनके नाम का 11 बार जाप करें। अंत में आरती करके पूजा का समापन करें। बता दें कि मासिक कार्तिगाई के दिन व्रत भी रखा जाता है, जिसका पारण सूर्यास्त के बाद होता है।
