Surya Rashi Parivartan 2023: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर को बहुत महत्वपूर्ण और प्रभावित करने वाला घटना माना जाता है। इसका प्रभाव पूरे मानव जीवन पर देखने को मिलता है। बता दें कि कर्मफलदाता शनि के कुंभ में गोचर करने के बाद और भगवान सूर्य भी कुंभ में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य देव 15 मार्च तक इसी राशि में रहेंगे। शनि के साथ सूर्य की यह युति 30 साल बाद बन रही है। शनिदेव को भगवान सूर्य का पुत्र माना गया है। इस गोचर के कारण पिता-पुत्र अब आमने-सामने आ चुके हैं। दोनों की यह युति जहां कई राशि के जातकों के लिए फायदेमंद रहने वाली है, वहीं कुछ राशियों के लिए यह नुकसानदायक रहेगा। आइए जानते हैं कि पिता-पुत्र के इस युति से किन राशि के जातकों को फायदा मिलेगा।
सूर्य राशि परिवर्तन 2023
मेष राशि
सूर्यदेव के कुंभ राशि में गोचर करने से मेष राशि वाले जातकों को फायदा ही फायदा मिलने वाला है। इस युति से इन राशि वालों का छिपा हुआ हुनर सामने आकर फायदा दिला सकता है। आर्थिक नजरिए से भी यह युति आपके लिए बहुत ही फायदेमंद रहने वाला है। पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर होने के साथ आकस्मित आर्थिक लाभ मिल सकता है। आपको सामाजिक रूप से भी फायदा मिल सकता है।
वृष राशि
सूर्य का गोचर वृष राशि के 10वें भाव में हुआ है। दशम भाव में सूर्य बहुत बलवान माने जाते हैं। इससे इन राशि के जातकों को करियर और कारोबार में फायदा मिल सकता है। पेशेवर लोगों को पहले से ज्यादा अधिकार मिलने के साथ आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। आर्थिक रूप से भी यह समय आपका पहले से बेहतर गुजरेगा।
मिथुन राशि
सूर्य देव ने मिथुन राशि के नौवें भाव में गोचर किया है। इस युति से इन राशि के जातकों को अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा। शनि और सूर्य की कृपा से आपकी आर्थिक प्रगति मिल सकती है। भाग्य भी आपका साथ देगा और आप कहीं से बड़ा लाभ हासिल कर सकते हैं। आप समाज में मान और सम्मान पाने के साथ शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ्य रहेंगे।
सिंह राशि
सूर्य इस राशि के सप्तम भाव में गोचर करेंगे। इससे आपको पहले की तुलना में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, लेकिन इसका आपको पूरा फायदा मिल सकता है और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। क्योंकि सूर्य की सीधी नजर आपकी राशि पर ही रहेगी, इसलिए आपको ज्यादा दौड़ भाग करना पड़ सकता है। नई जगहों की यात्रा करने के अलावा नए दोस्त भी बन सकते हैं। इस दौरान कोई नई बिजनेस डील भी साइन कर सकते हैं।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
