Sakat Chauth Paran Time & Vidhi (सकट चौथ व्रत पारण समय और विधि): भारत के उत्तर क्षेत्रीय राज्यों में माघ महीने में पड़ने वाले सकट चौथ के व्रत की महिमा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये व्रत माताओं द्वारा उनके पुत्रों को दीर्घायु करने के लिए रखा जाता है। मूलत: इस पावन व्रत में भगवान गणेश, सकट माता और चंद्र देव का पूजा-अर्चन किया जाता है। इस व्रत को करने से महिलाओं को सुखी घर-संसार, पुत्र रत्न की प्राप्ति का वरदान और संतानों की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है। ये व्रत बिना अन्न और जल के रखा जाता है। ऐेसे में अगर आप इसके पारण के समय और पारण की विधि की जानकारियां प्राप्त करना चाहते हैं तो आप यहां पर सकट चौथ व्रत पारण समय और विधि देख सकते हैं।
Sakat Chauth Paran Time (सकट चौथ पारण समय)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सकट चौथ के व्रत का पारण चंद्र देव की पूजा के बाद किया जाता है। ऐसे में सकट चौथ के चंद्रोदय रात में 9 बजकर 10 मिनट पर होगा जिसमें चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करके इस व्रत को पूर्ण किया जाएगा। इस दौरान चंद्र देव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है।
Sakat Chauth Paran Vidhi (सकट चौथ पारण विधि)
• इस व्रत का पारण चंद्रमा को देख कर करें
• भगवान को लगे भोग में के शकरकंदी या तिलकुट खाकर व्रत खोलें
• व्रत का पारण करते समय नमक वाली चीजों को न खाएं
• पारण करने के बाद से सात्विक भोजन और फलाहार ही ग्रहण करें।
Sakat Chauth Vrat Importance (सकट चौथ व्रत का महत्व)
माता और उसकी संतान का बंधन संसार का सबसे पवित्र बंधन होता है। माता अपनी संतान के मंगल के लिए हर व्रत और तप करती है, जिससे की उसकी संतान को देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिल सके और उसे सफलता हासिल हो। सकट चौथ का पावन व्रत करने से महिलाओं को धन, संपत्ति, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। इस धार्मिक अनुष्ठान और व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान गणेश संकटों से मुक्ति दिलाते हैं।
