Sakat Chauth Par Til Ka Bakra Kyon Kata Jata Hai: सकट चौथ का व्रत हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की विशेष पूजा होती है और उन्हें तिल-गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
सकट चौथ पर बकरा क्यों बनाया जाता है
इस दिन एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें तिल का बकरा बनाया जाता है और काटा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सकट चौथ पर बकरा बनाने और काटने के पीछे क्या कारण है? अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि सकट चौथ पर तिल का बकरा क्यों बनाया जाता है और इसे काटा क्यों जाता है?
क्यों काटा जाता है सकट चौथ पर बकरा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सकट चौथ पर तिल और गुड़ को मिलाकर एक बकरेनुमा आकृति बनाई जाती है। वहीं, कुछ क्षेत्रों चावल से बकरा बनाया जाता है। इसके बाद इसका पूजन किया जाता है और इसको काटा जाता है। काटने के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटा जाता है। यह कोई असली पशु बलि नहीं है, बल्कि पूरी तरह प्रतीकात्मक क्रिया है। इसका उद्देश्य है कि बच्चे के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं, संकट और बुरी नजर इस प्रतीकात्मक बकरे के काटने के साथ दूर हो जाएं।
भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और तिल-गुड़ उन्हें बहुत प्रिय है। तिलकुट (तिल और गुड़ की मिठाई) का भोग लगाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और संतान की रक्षा करते हैं। कुछ क्षेत्रों और परंपराओं में तिल-गुड़ से बकरे का आकार बनाकर उसे काटा जाता है। यह काटना बच्चे के सभी संकटों को दूर करने का प्रतीक है। काटने के बाद यह प्रसाद पूरे परिवार में बांटा जाता है, जिससे सभी को आशीर्वाद मिलता है। यह परंपरा संतान की सुरक्षा और सुख की कामना से जुड़ी है। माताएं इस व्रत को रखकर प्रार्थना करती हैं कि उनके बच्चे हर संकट से बचे रहें।
क्या है तिल का बकरा बनाने के पीछे वैज्ञानिक कारण?
सकट चौथ सर्दियों के अंत और बसंत ऋतु की शुरुआत के समय आता है। इस मौसम में शरीर को ठंड से गर्मी के लिए तैयार करना जरूरी होता है। तिल और गुड़ दोनों गर्म तासीर वाले पदार्थ हैं। तिल में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और स्वस्थ वसा भरपूर होती है, जो शरीर को गर्म रखती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। गुड़ आयरन का अच्छा स्रोत है और पाचन सुधारता है।
इन दोनों से बनी मिठाई खाने से शरीर में गर्मी आती है और मौसम बदलाव से होने वाली बीमारियां (जुकाम, खांसी, जोड़ों का दर्द) दूर रहती हैं। तिल का बकरा बनाकर खाना एक स्वादिष्ट और हेल्दी तरीका है।
साल 2026 में सकट चौथ का व्रत कब है?
साल 2026 में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार, माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि 6 जनवरी सुबह 08:01 बजे शुरू होकर 7 जनवरी सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। चंद्रोदय 6 जनवरी रात्रि 08:54 बजे चतुर्थी तिथि में ही होगा, इसलिए इसी दिन व्रत और पूजा शुभ है। इस दिन कई शुभ योग जैसे सर्वार्थ सिद्धि और प्रीति योग भी बन रहे हैं, जो व्रत को और फलदायी बनाएंगे।
सकट चौथ पर तिल का बकरा कैसे बनाएं और यह कब काटा जाता है?
इस दिन तिल को भूनकर उसे कूटकर पाउडर बनाया जाता है। इसमें गुड़ को भी कूटकर या गुड़ की चाशनी बनाकर डाला जाता है। इसके बाद उससे बकरे की आकृति और लड्डू बनाए जाते हैं। वहीं, जहां पर चावल से बकरा बनता है, उन जगहों पर भूने चावल से बकरे की आकृति बनाई जाती है। सबसे पहले इसका भोग भगवान गणेश को लगाया जाता है। चंद्रोदय के बाद या पूजा समाप्त होने पर प्रतीकात्मक रूप से बकरा काटा जाता है, जिसे घर को बच्चों द्वारा काटने की प्रथा है। काटने के बाद प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बांटा जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
