श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का रावणेश्वर शब्द-संबोधन एक अधर्म या ऐतिहासिक भूल!

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  • Updated Oct 2, 2022, 09:36 AM IST

शिवलिंग सौंपने के पूर्व ही महादेव रावण के समक्ष एक शर्त बिंदु भी रखते हैं कि वह शिवलिंग को जिस भी स्थान पर भूमि पर रखेगा शिवलिंग वही अवस्थित हो जाएगा जिसे रावण स्वीकार कर लेता है।

Shivling and Mahadev: भारत की विशुद्ध सनातन संस्कृति व सभ्यता के इतिहास में अनैतिक व अमानवीय कृतियों को न केवल सर्वथा निंदनीय माना गया है अपितु धर्म विहीन व धर्म विपरीत भी माना गया है। यद्यपि ऐसी सत्यता को भारत के अविस्मरणीय और अक्षुण्ण सभ्यता व संस्कृति का अभिन्न अंग भी इंगित किया गया है, तथापि अपवाद भी समक्ष हैं। इन्हीं अपवादों की श्रृंखला में एक अपवाद की ओर आप प्रबुद्ध विद्वत जनों का ध्यान आकृष्ट कराने की विनम्र अनुमति चाहता हूं।आगे जो विचारणीय प्रश्न रखूं उसके पूर्व यह भी कहना चाहूंगा कि यह अपवाद सुखद नहीं दुखद है अनीति का खंडन नहीं महिमामंडन करता है और यह सदियों से करता आ रहा है।

Shivling baidhyanath

प्रतीकात्मक तस्वीर

महादेव तो सर्वज्ञ हैं

तथ्य इस प्रकार है कि राक्षस राज रावण कैलाश के स्वामी महादेव से अनुनय कर अपने राज्य लंका नगरी चलने को, मुश्किल से ही सही, पर सहमत कर लेता है। सर्वेश्वर सदाशिव महादेव तो सर्वज्ञ हैं । खैर भोलेबाबा तो ठहरे भोले भाले और रावण के अनुरोध को मना नहीं कर पाते हैं। तदनुसार अपने प्रतीक शिवलिंग को रावण के हाथ सौंप देते हैं जिसे वह लंका नगरी में प्रस्थापित करने हेतु लंका नगरी को प्रस्थान करता है। रावण लंका प्रस्थान करने के क्रम में मार्ग में ही मूत्र उत्सर्जन हेतु अपने समक्ष उपस्थित ब्राह्मण को अनचाहे ही शिवलिंग इस आशय से सौपता है कि जैसे ही वह निवृत होगा वह शिवलिंग वापस प्राप्त कर लेगा।

शिवलिंग की महिमा

ब्राह्मण कोई और नहीं स्वयं श्री हरि नारायण श्री विष्णु ही होते हैं और अत्यंत प्रतीक्षा के उपरांत शिवलिंग को उसी स्थान पर भूमि पर रख देते हैं और शर्त के अनुसार शिवलिंग झारखंड प्रांत के वर्तमान देवघर में ही स्थित हो जाते हैं। इस प्राचीन तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि ना तो रावण की कभी कामना थी की स्वयं शिव से प्राप्त शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा देवघर के पावन भूमि में करे नाही उसने स्वयं शिवलिंग देवघर की भूमि पर रखी बल्कि यह तो ब्राह्मण स्वरूप स्वयं श्री विष्णु के कर कमलों द्वारा ही स्थापित हुआ।यह भी एक अद्भुत तथ्य है की महादेव के देवघर में ही स्थापित होने को लेकर राक्षस राज रावण अति क्रोधित भाव से शिवलिंग पर प्रहार करता है जिसके फलस्वरूप शिवलिंग भूमि पर थोड़े तीरछे से प्रतीत होते हैं।

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