रमजान का 15वां रोजा क्यों है खास, जानिए इस दिन कैसे करें अल्लाह की इबादत?

Ramadan Ka 15th Roza Kyu Khas Hota Hai: रमजान का 15वां रोजा मगफिरत के अशरे में आता है। यह रमजान के महीने का बीचोंबीच का समय होता है। इस रोजे का रूहानी तौर पर काफी अहम माना जाता है। इस दौरान की गई दुआ और इस्तगफार बेहद ही खास होता है। आइए जानते हैं कि 15वां रोजा क्यों खास है और इस दिन अल्लाह की इबादत कैसे करें?

Ramadan Ka 15th Roza Kyu Khas Hota Hai: रमजान का महीना तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसमें पहला अशरा रहमत का, दूसरा अशरा मगफिरत यानी माफी का और तीसरा अशरा जहन्नम से निजात का होता है। 15वां रोजा मगफिरत के अशरे के बीच में आता है। इस कारण इसे रूहानी तौर पर बहुत अहम माना जाता है। यह दिन बंदे को याद दिलाता है कि वह अपने गुनाहों की सच्चे दिल से तौबा करे और अल्लाह से माफी मांगे। इस दौरान की गई दुआ और इस्तगफार को खास अहमियत दी जाती है। माना जाता है कि जो इंसान सच्चे दिल से अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होकर माफी मांगता है, अल्लाह उसे बख्श देता है।

रमजान का 15वां रोजा क्यों खास है

रमजान का 15वां रोजा क्यों खास है?

इंसान की जरूरत और अल्लाह की बेनियाजी

इस्लाम की पवित्र किताब कुरआन में सूरह फातिर (35:15) में कहा गया है कि इंसान अल्लाह का मोहताज है और अल्लाह बेनियाज है। इसका मतलब यह है कि हर इंसान को अपने रब की जरूरत है, जबकि अल्लाह किसी का मोहताज नहीं है। 15वां रोजा इस बात का एहसास और गहरा करता है कि हमें अपनी कमजोरी समझनी चाहिए और हर हाल में अल्लाह की तरफ रुख करना चाहिए। रमजान के इस दौर में बंदा जब अपनी गलतियों को मानकर तौबा करता है तो वह अपने रब के और करीब हो जाता है।

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