वैदिक ज्योतिष अनुसार पंचक 5 दिनों की वो अवधि होती है जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करता है और इसके बाद शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है। इसे ही पंचक कहा जाता है। सरल शब्दों में समझें तो जब चंद्रमा कुंभ से मीन राशि में गोचर करता है तो ये समय पंचक कहलाता है। 20 फरवरी से पंचक लग चुका है। जानिए इस दौरान क्या न करें।
पंचक के दौरान कुछ कार्य किए जा सकते हैं तो कुछ पर रोक होती है
20 फरवरी 2023 से शुरू हुआ राज पंचक
20 फरवरी से राज पंचक शुरू लग गया है। इस पंचक को अशुभ नहीं माना जाता है। इसलिए इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही नहीं होती है। ये समय व्यापार के लिए अच्छा होता है।
पंचक के दौरान क्या करें और क्या न करें?
पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को कर सकते हैं जबकि कुछ खास कार्यों को करने की मनाही होती है जानिए इस दौरान क्या करें और क्या न करें।
क्या करें?
गृह प्रवेश समारोह, भाई दूज और रक्षाबंधन का पर्व पंचक के दौरान मनाया जा सकता है।
क्या न करें?
-पंचक का समय विवाह, मुंडन और नामकरण संस्कार के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।
-पंचक काल में व्यापार के लिए पैसे उधार लेने या फिर देने से बचना चाहिए। लेकिन अगर ऐसा करना जरूरी हो तो कार्य शुरू करने से पहले माता लक्ष्मी की पूजा करें।
-यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो परिवार के अन्य सदस्यों की रक्षा के लिए दाह संस्कार के समय आटे, बेसन और कुश (घास) से 5 पुतले बनाकर मृतक व्यक्ति के साथ उन पुतलों का भी अंतिम संस्कार कर देना चाहिए।
-पंचक के दौरान शनिवार के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। लेकिन अगर यात्रा जरूरी है तो शनिवार के ही दिन सर्वप्रथम हनुमान जी की पूजा करें। उन्हें प्रसाद के रूप में फलों का भोग लगाएं और इसके बाद ही अपनी यात्रा की शुरू करें।
