Narasimha Dwadashi Katha: क्यों मनाई जाती है नरसिंह द्वादशी, यहां पढ़ें इसकी व्रत कथा

Narasimha Dwadashi Vrat Katha In Hindi: शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी के नाम से जाना जाता है। जो इस बार 21 मार्च को पड़ रही है। यहां आप जानेंगे इस द्वादशी की पौराणिक व्रत कथा।

Narasimha Dwadashi Vrat Katha In Hindi: शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी का पर्व मनाया जाता है। इस साल ये द्वादशी 21 मार्च को मनाई जाएगी। इस द्वादशी पर भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है। माना जाता है कि नरसिंह भगवान श्री हरि विष्णु जी के ही अवतार हैं। जिनका आधा शरीर मनुष्य का है और आधा शेर का है। कहते हैं भगवान विष्णु ने ये रूप राजा हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए लिया था। यहां आप जानेंगे नरसिंह एकादशी की व्रत कथा।

Narasimha Dwadashi Katha

Narasimha Dwadashi Katha

नरसिंह द्वादशी की व्रत कथा (Narasimha Dwadashi Vrat Katha In Hindi)

प्राचीन काल में कश्यप नाम के ऋषि रहा करते थे। जिनकी पत्नी का नाम दिति था और उनके दो पुत्र थे पहला हिरण्याक्ष और दूसरा हिरण्यकश्यप। बताया जाता है कि, यह दोनों ऋषि के पुत्र थे इसके बाद भी इनकी प्रवृत्ति असुर वाली हो गई थी। दोनों भाइयों ने चारों और हाहाकार मचा दिया था। ऐसे में भगवान विष्णु ने वराह रूप में पृथ्वी की रक्षा करने के लिए हिरण्याक्ष का वध कर दिया था। अपने भाई की मृत्यु से हिरण्यकश्यप को बेहद दुख हुआ और उसी दिन से वह भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानने लगा। इसके बाद हिरण्यकश्यप अपने प्रतिशोध का बदला लेने के लिए कठोर तपस्या करने लगा जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी से उसने मनचाहा वरदान प्राप्त किया।

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