Mauni Amavasya Vrat Katha In Hindi (मौनी अमावस्या व्रत कथा): माघ महीने की मौनी अमावस्या को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी के जल में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस साल ये अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जा रही है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। इसके अलावा ये दिन मौन व्रत रखने के लिए भी बेहद उत्तम माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की जाती है। चलिए आपको बताते हैं मौनी अमावस्या क्यों मनाई जाती है, इसका पौराणिक महत्व क्या है।
Mauni Amavasya Vrat Katha In Hindi
मौनी अमावस्या व्रत कथा (Mauni Amavasya Vrat Katha)
मौनी अमावस्या की कथा अनुसार एक बार कांचीपुरी में देवस्वामी नामक एक ब्राह्मण अपने बेटे और बेटी के साथ रहता था। जिसकी पत्नी का नाम धनवती था और उसके सभी बेटों का विवाह हो चुका था। अब बस उसकी एक पुत्री ही विवाह योग्य बची थी जिसके लिए वर की खोज की जा रही थी। इस कार्य के लिए ब्राह्मण ने अपने बड़े बेटे को नगर भेजा था। जब ब्राह्मण ने एक ज्योतिषी को अपनी बेटी की कुंडली दिखाई, तो ज्योतिषी ने उसे बताया कि आपकी बेटी जिस किसी से शादी करेगी उस इंसान की शादी के तुरंत बाद ही मृत्यु हो जाएगी और आपकी बेटी विधवा हो जाएगी। ये बात सुनकर ब्राह्मण दुखी हो गया। लेकिन ज्योतिषी ने इस समस्या का उपाय भी बताया और ब्राह्मण को कहा कि सिंहलद्वीप में एक सोमा नाम की धोबिन रहती है। यदि वह आपके घर आकर पूजा करेंगी, तो इससे आपकी बेटी की कुंडली से विधवा का दोष समाप्त हो जाएगा।
जिसके बाद ब्राह्मण उस महिला की तलाश में निकल पड़ा, लेकिन इसके लिए उसे समुद्र को पार करना था जिसे पार करना काफी मुश्किल था। जब काफ़ी समय तक कोई उपाय नहीं मिला, तो वह भूखा-प्यासा ही एक वट वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया। उस पेड़ पर एक गिद्ध का परिवार रहा करता था। ब्राह्मण से गिद्ध ने उसकी उदासी का कारण पूछा, तब उसने सारी बात बतला दी। ये बात सुनकर गिद्ध ने ब्राह्मण को उसकी समस्या का समाधान करने आश्ववासन दिया। फिर अगले दिन गिद्ध ने देवस्वामी को उस धोबिन के घर पहुंचा दिया।
जिसके बाद, देवस्वामी ने सोमा को पूजा करने के लिए उसके घर आने के लिए कहा और फिर धोबिन सोमा स विधि-विधान से पूजा करने के बाद गुणवती का विवाह कर दिया गया। लेकिन, इस उपाय को करने के बाद भी उसके पति का निधन हो गया और फिर सोमा ने अपने पुण्य का दान गुणवती को दिया। जिसके बाद उसका पति पुनः जीवित हो गया। जब सोमा धोबिन अपने घर वापस आ गई तो उसने देखा कि उसके पुण्य कर्मों गुणवती को देने की वजह से उसके बेटे, पति और दामाद की मृत्यु हो गई है। जिसके बाद सोमा नदी के किनारे पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करने लगी और साथ ही, उसने पीपल की भी 108 बार परिक्रमा की। जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसके बेटे, पति और दामाद को पुनः जीवित कर दिया। कहते हैं उस समय से ही मौनी अमावस्या का व्रत रखने की परंपरा शुरू हो गई।
