Makar Sankranti Katha: मकर संक्रांति पर जरूर पढ़ें धर्मराज की कहानी

Makar Sankranti Ki Katha: मकर संक्रांति पर्व के दिन कई लोग उपवास रखते हैं और विधि विधान सूर्य देव की उपासना करते हैं। इस दिन धर्मराज की ये कहानी जरूर सुननी चाहिए।

Makar Sankranti Ki Katha (मकर संक्रांति की कथा): हिंदू धर्म में शायद ही कोई ऐसा त्योहार हो जिससे जुड़ी कोई पौराणिक कथा या कहानी न हो। बात मकर संक्रांति पर्व की करें तो इससे जुड़ी भी कई कहानियां प्रचलित हैं। बता दें इस साल मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगा मैया भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जा मिली थीं। कहते ये भी हैं कि इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत किया था। साथ ही इस पर्व की एक कहानी धर्मराज से भी जुड़ी है जिससे इस पर्व में जरूर पढ़ना या सुनना चाहिए।

Makar Sankranti Ki Katha

Makar Sankranti Katha, Kahani And Story In Hindi

मकर संक्रांति पर धर्मराज की कहानी (Makar Sankranti Dharamraj Ki Kahani)

एक समय जब पृथ्वीलोक पर बबरुवाहन नामक एक राजा हुआ करता था। उसके राज्य में किसी चीज की कमी नहीं थी। इसी राज्य में एक हरिदास नामक ब्राह्मण भी निवास करता था। जिसका विवाह गुणवती से हुआ था जो कि बहुत ही धर्मवती एवं पतिव्रता महिला थी। गुणवती ने अपना पूरा जीवन सभी देवी देवताओं की उपासना में लगा दिया और वह सभी प्रकार के व्रत करती थी और दान धर्म भी किया करती थी। इसके अलावा अतिथि सेवा को वह अपना धर्म मानती थी। ऐसे ही ईश्वर की उपासना करते हुए वह वृद्ध हो गयी। जब उसकी मृत्यु हुई तो धर्मराज के दूत उसे अपने साथ धर्मराजपुर ले गए।

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