Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति को कहा जाता है खिचड़ी महोत्सव भी, गुरु गोरखनाथ ने इसलिए दिया था इसे ये नाम

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 10, 2023, 02:28 PM IST

Makar Sankranti 2023: अक्रांता खिलजी के भारत पर आक्रमण पर नाथ संप्रदाय के योगियों ने लिया था लोहा। दिन रात करते थे युद्ध। शरीर में पोषण की कमी न हो इसके लिए बाबा गोरखनाथ ने सब्जियों और दाल− चावल का मिश्रण यानि खिचड़ी का सेवन करने की दी थी सलाह। तभी से मकर संक्रांति जोकि है ऋतु परिवर्तन का समय और सर्दियों में हो जाती है पाचन क्रिया सुस्त तो इस दिन खिचड़ी का सेवन करने की शुरू की गयी परंपरा।

KEY HIGHLIGHTS
- खिलजी के आक्रमण के समय शुरू हुयी थी परंपरा
− उड़द की दाल, चावल और सब्जियों की होती है खिचड़ी
− सर्दी में सुस्त पाचन क्रिया तो खिचड़ी देती है गति


Makar Sankranti 2023: सूर्य नारायण भगवान का मकर राशि में प्रवेश का समय। उनके दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा का समय। वो समय जब शीत ऋतु अपनी प्रचंडता त्याग बंसत के स्वागत की ओर अग्रसर होती है। ये वो समय है जब शरीर भी सर्द हवाओं की जकड़न से बाहर निकल पौष्टिकता की ओर बढ़ना चाहता है। इसलिए मकर संक्रांति के पर्व विशेष रूप से खिचड़ी जैसा पौष्टिक आहार बनाया जाता है। लेकिन बात इतनी भर नहीं है। इसके पीछे एक विशेष कहानी भी जुड़ी हुयी है।

Makar Sankranti 2023

मकर संक्रांति को कहा जाता है खिचड़ी महोत्सव

मकर संक्रांति को पूरब में खिचड़ी महोत्सव के रूप में मनाने की परंपरा भी हमारे देश में है। यूं तो दक्षिण में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। लेकिन क्योंकि पूरे देश में खिचड़ी महोत्सव को अधिक जाना जाता है तो आज हम आपको बताते हैं इसके पीछे के इतिहास के बारे में, जोकि सीधा जुड़ा है गुरु गोरखनाथ से।

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