Lalita Jayanti Vrat Katha: ललिता जयंती व्रत कथा, पढ़ें भंडासुर राक्षस और ललिता माता की कहानी

Lalita Jayanti Vrat Katha (ललिता जयंती व्रत कथा): आज ललिता जयंती है। ये दिन मां ललिता त्रिपुरसुंदरी के प्राकट्य का दिन है, जिन्हें आदि शक्ति, राजराजेश्वरी और श्रीविद्या परंपरा की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। आज के दिन ललिता माता की कथा का पाठ जरूर करना चाहिए, इससे मां का आशीर्वाद मिलता है।

Lalita Jayanti Vrat Katha (ललिता जयंती व्रत कथा): पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार नैमिषारण्य में यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें महादेव के ससुर दक्ष प्रजापति भी शामिल हुए। दक्ष प्रजापति के पहुंचने पर उन्हें देखकर सभी देवगण उनके सम्मान में खड़े हो गए, लेकिन भोलेनाथ अपने आसन पर विराजमान रहे। दक्ष ये यह सहा नहीं गया, वह पहले ही अपने जमाई को कुछ खास पसंद नहीं करते थे और यह घटना उन्हें दामाद द्वारा अपना अपमान लगी। इसके बाद प्रजापति दक्ष के घर एक शुभ मौका आया, उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन अपमान की अग्नि में जल रहे दक्ष ने अपनी बेटी और दामाद को न्योता नहीं भेजा।

ललिता जयंती व्रत कथा (pc: pinterest)

इसके बावजूद माता पार्वती शिव जी से उस यज्ञ में जाने की बात करने लगीं। शिव जी ने मना करते हुए कहा कि जहां का बुलावा नहीं मिला है, वहां जाना उचित नहीं होगा। लेकिन वह पति की बात न मानते हुए बिना बुलाए ही पिता दक्ष के घर पहुंच गईं। जहां प्रजापति दक्ष ने शिव जी का बहुत अपमान किया, जिसे माता सती सह न सकीं और उन्होंने उसी पवित्र अग्नि कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए।

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