Krichra Chaturthi Vrat Katha: कृच्छ्र चतुर्थी व्रत कथा, मार्गशीर्ष माह की विनायक चतुर्थी पर पढ़ें भगवान गणेश और शिव जी की कहानी

Krichra Chaturthi Vrat Katha (कृच्छ्र चतुर्थी व्रत कथा): मार्गशीर्ष माह में आने वाली विनायक चतुर्थी को कृच्छ्र चतुर्थी कहते हैं। आज वही खास दिन है। आज के दिन व्रत कथा का पाठ करने से संकटों से मुक्ति मिल जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। यहां से आप मार्गशीर्ष माह की चतुर्थी व्रत कथा पढ़ सकते हैं। देखें कृच्छ्र चतुर्थी व्रत कथा यहां।

Krichra Chaturthi Vrat Katha (कृच्छ्र चतुर्थी व्रत कथा): कृच्छ्र चतुर्थी की सबसे लोकप्रिय कथा माघ माह की सकट चौथ से जुड़ी है, जो इस व्रत के महत्व को दर्शाती है। प्राचीन काल में एक बार माता पार्वती स्नान करने गईं और उन्होंने गणेश जी को द्वारपाल बनाकर बाहर खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी आज्ञा के बिना किसी को भी भीतर प्रवेश न करने दिया जाए। कुछ देर बाद भगवान शिव आए और भीतर जाने लगे, तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिव जी क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया।

कृच्छ्र चतुर्थी व्रत कथा (pic credit: canva)

जब माता पार्वती को यह बात पता चली, तो वह अत्यंत दुखी हुईं और उन्होंने क्रोध में आकर प्रलय लाने की चेतावनी दी। सभी देवताओं ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया। तब भगवान शिव ने एक हाथी का सिर गणेश जी के धड़ से जोड़कर उन्हें पुनः जीवनदान दिया और उन्हें यह वरदान दिया कि त्रिलोक में उनकी पूजा सबसे पहले होगी।

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