Karwa Chauth Aaj Chand Kitne Baje Niklega Live Updates: करवा चौथ का महात्म्य, व्रत के नियम, पूजा सामग्री और चंद्रोदय का समय यहाँ देखें
Karwa Chauth 2026 Moon Rise Timing, Aaj Chand Kitne Baje Niklega LIVE Updates:करवाचौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 29 अक्टूबर को रखा जाता है। इस व्रत की शुरुआत 29 अक्टूबर की सुबह सरगी लेने से हो जाएगी। इसके बाद चंद्र अर्घ्य और पति के दर्शन व उनके हाथ से व्रत का पारण कर समाप्त होगी।
Karwa Chauth Aaj Chand Kitne Baje Niklega Live Updates: करवा चौथ का महात्म्य, व्रत के नियम, पूजा सामग्री और चंद्रोदय का समय यहाँ देखें
• नोएडा: रात 8:16 बजे
• दिल्ली: रात 8:17 बजे
• गाजियाबाद: रात 8:17 बजे
• गुरुग्राम: रात 8:18 बजे
• मेरठ: रात 8:07 बजे
• लखनऊ: रात 8:06 बजे के आसपास
• कानपुर: रात 8:05 बजे के आसपास
• मुंबई: रात 9:00 बजे
करवा चौथ की पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
करवा चौथ 2026 पर क्या रहेगा शाम की पूजा का समय
गाजियाबाद में आज करवा चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा
नॉएडा में आज करवा चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा
करवा चौथ का महात्म्य
करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल और सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समान किसी सुहागिन महिला के पैर छूकर उन्हें सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए।
करवा चौथ की पूजा सामग्री
करवा चौथ व्रत के नियम
2. यह व्रत उनको संध्या में सूरज अस्त होने के बाद चन्द्रमा के दर्शन करके ही खोलना चाहिए और बीच में जल भी नहीं पीना चाहिए।
3. संध्या के समय चंद्रोदय से 1 घंटा पहले एक वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा (मूर्ति के अभाव में सुपारी) की स्थापना करें एवं माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से शृंगार करें तथा कथा सुनें। इसमें 10 से 13 करवे (करवा चौथ के लिए खास मिट्टी के कलश) रखें।
4. पूजन-सामग्री में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि थाली में रखें। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी रहना चाहिए, जिससे वह पूरे समय तक जलता रहे।
5. पूजन के समय देव-प्रतिमा का मुख पश्चिम की तरफ होना चाहिए तथा स्त्री को पूर्व की तरफ मुख करके बैठना चाहिए।
6. चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू की जानी चाहिए। अच्छा हो कि परिवार की सभी महिलाएँ साथ पूजा करें।
7. चन्द्र-दर्शन छलनी के द्वारा किया जाना चाहिए और साथ ही दर्शन के समय अर्घ्य के साथ चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से जल एवं मिठाई खा कर व्रत खोलें।
8. चन्द्र-दर्शन के बाद बहू अपनी सास को थाली में सजाकर मिठान, फल, मेवे, रुपये आदि देकर उनका आशीर्वाद ले और सास उसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दें।
करवा चौथ का व्रत टूट जाए तो क्या करना चाहिए
Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi (करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा)
श्री गणेशाय नमः !
एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। एक बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सेठानी, उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा। रात के समय जब साहूकार के सभी बेटे भोजन करने के लिए बैठे तो उन्होंने अपनी प्रिय बहन को भोजन कर लेने के लिए कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देने के बाद ही मैं भोजन करूंगी।
चूंकि साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे, इसलिए उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा काफी दुख दे रहा था। साहूकार का एक बेटा नगर के बाहर चला गया और उसने वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उसने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा कि चांद निकल आया है, तुम सब भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन ये चांद नहीं है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात अनसुनी कर दी और वो भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देने पहुंच गई। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग होने की वजह से भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण ही उसका पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में खर्च हो गया।
साहूकार की बेटी को जब अपने दोषों का पता लगा तो उसने बहुत पश्चाताप किया। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू किया। उसने उपस्थित सभी लोगों का आदर किया और तदुपरांत सबसे आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस प्रकार लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर भगवान गणेश उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। इस तरह से लड़की के पति को सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिल गई और उसे धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
करवा चौथ के भजन लिरिक्स इन हिंदी
चौथ मां की महिमा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली
चौथ मां की महिमा है निराली
मैया मेरी बिंदिया अमर रखना मैया
मेरी मांग मोतियों से भरना मैया
तेरी पूजा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली मैया
मेरा चुड़ला अमर रखना मैया
मेरी महंदी लाल रखना मैया
तेरी पूजा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली मैया
मेरी पायल अमर रखना मैया
मेरे बिछुआ अमर रखना मैया
मेरी महावर लाल रखना मैया
तेरी पूजा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली
मैया सबकी जोड़ी अमर रखना मैया
सबके सिर पर हाथ रखना मैया
तेरी पूजा है निराली सुहाग वर मैया देने वाली
Chauth Maa Ki Mahima Hai Nirali Bhajan Lyrics
गाओ गाओ मंगल गीत
गाओ गाओ मंगल गीत के आज करवा चौथ है
वर मांगो अमर हो सुहाग खुल जाये अपने भाग
काम होना पिया जी के प्रीत के आज करवा चौथ है
अर्क करो और दीप जलाओ गोरी के आछात से
सिंदूर चढ़ावो दही पतासा के भोग लगावो कही
शुभ घडी जाए ना बीत के आज करवा चौथ है
मांगो असीस खिले घर आँगन देखु जहा
बस देखु मैं साजन गाड़ी कर दो ऐसी प्रीत हैं
के आज करवा चौथ है गाओ गाओ मंगल गीत के आज करवा चौथ है
करवा चौथ व्रत शुरु कैसे करें
सूर्योदय के साथ करवाचौथ व्रत आरंभ
सरगी खाने का समय जल्द होगा खत्म
सरगी खाने का समय हुआ शुरू
सरगी की थाली में क्या-क्या रखें
करवा चौथ के व्रत में दिन में सो सकते हैं या नहीं
करवे में क्या-क्या डाला जाता है
छलनी से ही क्यों देखा जाता है चंद्रमा
करवाचौथ के दिन चंद्रमा के साथ किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है
करवा चौथ व्रत कथा
एक बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को साहूकार की पत्नी, उसकी सातों बहुओं और बेटी वीरावती ने करवा चौथ का व्रत रखा। वीरावती ने भी अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। दिनभर भूखी-प्यासी रहने के कारण शाम होते-होते उसकी हालत कमजोर होने लगी।
रात के समय जब वीरावती के सातों भाई भोजन करने बैठे, तो उन्होंने अपनी बहन को भी खाना खाने के लिए कहा। वीरावती ने बताया कि उसने करवा चौथ का व्रत रखा है और वह चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलेगी।
अपनी प्यारी बहन को भूख और प्यास से परेशान देखकर सभी भाई दुखी हो गए। उन्होंने सोचा कि अगर बहन को चंद्रमा के दर्शन करा दिए जाएं, तो वह भोजन कर सकेगी और उसकी परेशानी भी दूर हो जाएगी।
भाइयों ने दिखाया नकली चांद
वीरावती के भाइयों ने उसे भोजन कराने के लिए एक उपाय सोचा। वे घर से बाहर गए और दूर एक पेड़ पर चढ़कर आग जला दी। आग की रोशनी दूर से चंद्रमा जैसी दिखाई देने लगी।
इसके बाद सभी भाई घर लौटे और वीरावती से कहा कि चंद्रमा निकल आया है। अब वह चंद्रदेव को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकती है।
वीरावती ने अपने भाइयों की बात मान ली। उसकी भाभियों ने उसे समझाया कि अभी चंद्रमा नहीं निकला है। उसके भाई उसे भ्रम में डाल रहे हैं, लेकिन वीरावती ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
वह भाइयों के दिखाए प्रकाश को चंद्रमा समझकर अर्घ्य देने पहुंच गई। पूजा करने के बाद उसने भोजन करना शुरू कर दिया।
कथा के अनुसार, वीरावती ने जैसे ही भोजन का पहला निवाला खाया, उसमें बाल निकल आया। दूसरा निवाला खाते समय उसे जोर से छींक आ गई। तीसरा निवाला खाने से पहले ही उसके ससुराल से संदेश आया कि उसके पति की तबीयत बहुत खराब हो गई है।
यह खबर सुनकर वीरावती घबरा गई और तुरंत अपने ससुराल पहुंची। वहां जाकर उसने देखा कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। अपने पति को इस अवस्था में देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगी।
वीरावती को समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। वह अपने पति को दोबारा जीवित करने के लिए भगवान से प्रार्थना करने लगी।
देवी इंद्राणी ने बताया व्रत का महत्व
वीरावती के दुख को देखकर देवी इंद्राणी वहां प्रकट हुईं। उन्होंने वीरावती को बताया कि उसने चंद्रमा निकलने से पहले ही व्रत खोल दिया था। इसी कारण उसके व्रत में बाधा आई और उसे यह दुख सहना पड़ रहा है।
देवी इंद्राणी ने वीरावती को सलाह दी कि वह सच्चे मन से भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करे। साथ ही, अगले करवा चौथ पर पूरे नियम और श्रद्धा के साथ व्रत रखे। देवी ने उसे विश्वास दिलाया कि उसकी सच्ची भक्ति और प्रार्थना से उसके पति को फिर से जीवन मिल सकता है।
वीरावती को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने मन ही मन संकल्प लिया कि वह आगे से करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा और सही विधि से करेगी।
वीरावती ने देवी की बात मानकर भगवान गणेश और करवा माता की आराधना शुरू कर दी। वह हर चतुर्थी पर व्रत करने लगी और अगले साल करवा चौथ आने पर उसने पूरे विधि-विधान के साथ व्रत रखा।
उसने करवा माता से अपने पति के जीवन की प्रार्थना की और चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोला। वीरावती की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश और करवा माता ने उस पर कृपा की। लोकमान्यता के अनुसार, करवा माता के आशीर्वाद से वीरावती के पति को दोबारा जीवन मिल गया। वीरावती अपने पति को जीवित देखकर बहुत खुश हुई। इसके बाद उसने जीवनभर करवा चौथ का व्रत श्रद्धा के साथ करने का संकल्प लिया। कहते हैं कि तभी से करवा चौथ की पूजा में वीरावती की कथा सुनने की परंपरा चली आ रही है।
हे करवा माता! जैसे आपने वीरावती के पति को जीवनदान दिया और उसके सुहाग की रक्षा की, वैसे ही सभी सुहागिन महिलाओं के सुहाग की रक्षा करना। सभी के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनाए रखना और उनके पतियों को लंबी उम्र देना।
करवा माता की जय!
