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Karwa Chauth Aaj Chand Kitne Baje Niklega Live Updates: करवा चौथ का महात्म्य, व्रत के नियम, पूजा सामग्री और चंद्रोदय का समय यहाँ देखें

Karwa Chauth 2026 Moon Rise Timing, Aaj Chand Kitne Baje Niklega LIVE Updates:करवाचौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 29 अक्टूबर को रखा जाता है। इस व्रत की शुरुआत 29 अक्टूबर की सुबह सरगी लेने से हो जाएगी। इसके बाद चंद्र अर्घ्य और पति के दर्शन व उनके हाथ से व्रत का पारण कर समाप्त होगी।

Karwa Chauth Aaj Chand Kitne Baje Niklega Live Updates: करवा चौथ का महात्म्य, व्रत के नियम, पूजा सामग्री और चंद्रोदय का समय यहाँ देखें

Karwa Chauth Aaj Chand Kitne Baje Niklega Live Updates: करवा चौथ का महात्म्य, व्रत के नियम, पूजा सामग्री और चंद्रोदय का समय यहाँ देखें

Karwa Chauth 2026 Aaj Chand Kitne Baje Niklega LIVE Updates: करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद व्रत शुरू होता है। शाम को करवा चौथ माता की पूजा और व्रत कथा सुनने के बाद महिलाएं चांद निकलने का इंतजार करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के दर्शन करने के बाद व्रत खोला जाता है। यहां जानिए करवा चौथ 2026 का सरगी टाइम, पूजा मुहूर्त, चांद निकलने का समय, व्रत विधि और करवा चौथ की पूरी कहानी क्या है।

• नोएडा: रात 8:16 बजे
• दिल्ली: रात 8:17 बजे
• गाजियाबाद: रात 8:17 बजे
• गुरुग्राम: रात 8:18 बजे
• मेरठ: रात 8:07 बजे
• लखनऊ: रात 8:06 बजे के आसपास
• कानपुर: रात 8:05 बजे के आसपास
• मुंबई: रात 9:00 बजे

करवा चौथ की पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

  • करवा चौथ 2026 की तारीख: 29 अक्टूबर, गुरुवार
  • करवा चौथ पर ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:48 से 5:39 बजे तक
  • करवा चौथ पर अमृत काल: सुबह 8:17 से 9:44 बजे तक
  • करवा चौथ पर सरगी खाने का समय: सूर्योदय से पहले, सुबह 6:31 बजे से पहले
  • करवा चौथ पर सूर्योदय का समय: सुबह 6:31 बजे
  • करवा चौथ पर सूर्यास्त का समय: शाम 5:38 बजे
  • करवा चौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 से 6:55 बजे तक
  • करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय: रात 8:17 बजे
  • करवा चौथ पर चंद्रास्त का समय: सुबह 9:52 बजे
  • करवा चौथ पर अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
  • करवा चौथ पर विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 से 2:40 बजे तक
  • करवा चौथ पर गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:38 से 6:04 बजे तक
  • करवा चौथ पर निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 30 अक्टूबर की रात 12:31 बजे तक


करवा चौथ 2026 पर क्या रहेगा शाम की पूजा का समय

OCT 29, 2026 11:47 IST

गाजियाबाद में आज करवा चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा

गाजियाबाद में आज करवा चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा। गाजियाबाद में आज सूर्यास्त 5:39:31 PM और चंद्रोदय का टाइम 8:10 PM
OCT 29, 2026 11:45 IST

नॉएडा में आज करवा चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा

नॉएडा में आज करवा चौथ का चाँद कितने बजे निकलेगा। नॉएडा में आज सूर्यास्त 5:39:52 PM और चंद्रोदय का टाइम 8:11 PM
OCT 29, 2026 11:33 IST

करवा चौथ का महात्म्य

छांदोग्य उपनिषद के अनुसार, चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्म की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही, लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है।

करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल और सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समान किसी सुहागिन महिला के पैर छूकर उन्हें सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए।
OCT 29, 2026 10:59 IST

करवा चौथ की पूजा सामग्री

कुमकुम, सिंदूर, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेहंदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, हिंगुल/सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा के लिए पैसे।
OCT 29, 2026 10:57 IST

करवा चौथ व्रत के नियम

1. सुबह सूर्योदय से पहले स्नान आदि करके पूजा घर की सफाई करें। और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।

2. यह व्रत उनको संध्या में सूरज अस्त होने के बाद चन्द्रमा के दर्शन करके ही खोलना चाहिए और बीच में जल भी नहीं पीना चाहिए।

3. संध्या के समय चंद्रोदय से 1 घंटा पहले एक वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा (मूर्ति के अभाव में सुपारी) की स्थापना करें एवं माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से शृंगार करें तथा कथा सुनें। इसमें 10 से 13 करवे (करवा चौथ के लिए खास मिट्टी के कलश) रखें।

4. पूजन-सामग्री में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि थाली में रखें। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी रहना चाहिए, जिससे वह पूरे समय तक जलता रहे।

5. पूजन के समय देव-प्रतिमा का मुख पश्चिम की तरफ होना चाहिए तथा स्त्री को पूर्व की तरफ मुख करके बैठना चाहिए।

6. चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू की जानी चाहिए। अच्छा हो कि परिवार की सभी महिलाएँ साथ पूजा करें।

7. चन्द्र-दर्शन छलनी के द्वारा किया जाना चाहिए और साथ ही दर्शन के समय अर्घ्य के साथ चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से जल एवं मिठाई खा कर व्रत खोलें।

8. चन्द्र-दर्शन के बाद बहू अपनी सास को थाली में सजाकर मिठान, फल, मेवे, रुपये आदि देकर उनका आशीर्वाद ले और सास उसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दें।
OCT 29, 2026 09:35 IST

करवा चौथ का व्रत टूट जाए तो क्या करना चाहिए

करवा चौथ का व्रत अनजाने में टूट जाए, तो घबराएं नहीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान से क्षमा मांगें और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। अपनी सेहत का ध्यान रखें और परिवार की परंपरा के अनुसार आगे का निर्णय लें। व्रत टूटने पर खुद को दोषी मानकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।
OCT 29, 2026 08:34 IST

Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi (करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा)


श्री गणेशाय नमः !

एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। एक बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सेठानी, उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा। रात के समय जब साहूकार के सभी बेटे भोजन करने के लिए बैठे तो उन्होंने अपनी प्रिय बहन को भोजन कर लेने के लिए कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देने के बाद ही मैं भोजन करूंगी।

चूंकि साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे, इसलिए उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा काफी दुख दे रहा था। साहूकार का एक बेटा नगर के बाहर चला गया और उसने वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उसने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा कि चांद निकल आया है, तुम सब भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन ये चांद नहीं है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।


साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात अनसुनी कर दी और वो भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देने पहुंच गई। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग होने की वजह से भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण ही उसका पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में खर्च हो गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने दोषों का पता लगा तो उसने बहुत पश्चाताप किया। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू किया। उसने उपस्थित सभी लोगों का आदर किया और तदुपरांत सबसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर भगवान गणेश उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। इस तरह से लड़की के पति को सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिल गई और उसे धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
OCT 29, 2026 07:27 IST

करवा चौथ के भजन लिरिक्स इन हिंदी

चौथ मां की महिमा है निराली
चौथ मां की महिमा है निराली

सुहाग वर मैया देने वाली
चौथ मां की महिमा है निराली
मैया मेरी बिंदिया अमर रखना मैया
मेरी मांग मोतियों से भरना मैया
तेरी पूजा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली मैया
मेरा चुड़ला अमर रखना मैया
मेरी महंदी लाल रखना मैया
तेरी पूजा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली मैया
मेरी पायल अमर रखना मैया
मेरे बिछुआ अमर रखना मैया
मेरी महावर लाल रखना मैया
तेरी पूजा है निराली
सुहाग वर मैया देने वाली
मैया सबकी जोड़ी अमर रखना मैया
सबके सिर पर हाथ रखना मैया
तेरी पूजा है निराली सुहाग वर मैया देने वाली

Chauth Maa Ki Mahima Hai Nirali Bhajan Lyrics

गाओ गाओ मंगल गीत
गाओ गाओ मंगल गीत के आज करवा चौथ है
वर मांगो अमर हो सुहाग खुल जाये अपने भाग
काम होना पिया जी के प्रीत के आज करवा चौथ है
अर्क करो और दीप जलाओ गोरी के आछात से
सिंदूर चढ़ावो दही पतासा के भोग लगावो कही
शुभ घडी जाए ना बीत के आज करवा चौथ है
मांगो असीस खिले घर आँगन देखु जहा
बस देखु मैं साजन गाड़ी कर दो ऐसी प्रीत हैं
के आज करवा चौथ है गाओ गाओ मंगल गीत के आज करवा चौथ है
OCT 29, 2026 06:47 IST

करवा चौथ व्रत शुरु कैसे करें

करवा चौथ के व्रत में सुबह सरगी के बाद, स्नान कर 16 श्रृंगार करने का विधान होता है। जिसके बाद पूजा के लिए शुभ मुहूर्त देखकर भगवान गणेश, पार्वती माता और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करनी होती है।
OCT 29, 2026 06:31 IST

सूर्योदय के साथ करवाचौथ व्रत आरंभ

सुबह 6 बजकर 30 पर सूर्योदय हो गया है। इसके साथ निर्जला करवाचौथ का व्रत आरंभ हो गया है। अब व्रती महिलाएं कोशिश करें कि कुछ भी भारी काम न करें, जिससे प्यास लगे। शाम को पूजा की तैयारी करें।
OCT 29, 2026 04:30 IST

सरगी खाने का समय जल्द होगा खत्म

करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं ध्यान दें, सरगी खाने का समय अब समाप्त होने वाला है। अगर आपने अभी तक सरगी नहीं खाई है, तो सूर्योदय से पहले इसे ग्रहण कर लें। दिल्ली-एनसीआर में आज 29 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह करीब 6:30 बजे होगा। इसके बाद करवा चौथ का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। सरगी में फल, फेनी, ड्राई फ्रूट्स और हल्का भोजन लेने के साथ पर्याप्त पानी भी पी लें, ताकि दिनभर कमजोरी और प्यास से बचने में मदद मिले। ध्यान रखें कि सूर्योदय से पहले ही सरगी और पानी का सेवन पूरा कर लें।
OCT 29, 2026 03:30 IST

सरगी खाने का समय हुआ शुरू

करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सरगी खाने का समय शुरू हो गया है। आज 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण करनी है। महिलाएं सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच सरगी खा सकती हैं। दिल्ली-एनसीआर में सूर्योदय सुबह करीब 6:30 बजे होगा, जबकि ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:47 बजे से 5:39 बजे तक रहेगा। सरगी की थाली में फेनी, फल, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई और दही जैसी चीजें शामिल कर सकती हैं। इसके साथ ही पानी, दूध या नारियल पानी भी लें, ताकि दिनभर शरीर में पानी की कमी न हो। ध्यान रखें कि सरगी का सेवन सूर्योदय से पहले पूरा कर लें, क्योंकि इसके बाद करवा चौथ का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा।
OCT 29, 2026 02:30 IST

सरगी की थाली में क्या-क्या रखें

सरगी की थाली में फेनी या मठरी, मिठाई, फल, ड्राई फ्रूट्स, दही और अपनी पसंद का हल्का भोजन शामिल कर सकते हैं। इसके साथ नारियल पानी या दूध भी लिया जा सकता है, ताकि दिनभर प्यास और कमजोरी महसूस होने की आशंका कम रहे। सरगी में ऐसी चीजें रखें जो पेट भरें और शरीर को एनर्जी दें।
OCT 29, 2026 01:30 IST

करवा चौथ के व्रत में दिन में सो सकते हैं या नहीं

करवा चौथ के व्रत में दोपहर के समय सोना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित नहीं माना जाता है। मान्यता है कि व्रत के दौरान महिलाओं को अपना समय पूजा-पाठ, करवा चौथ की कथा सुनने और शाम की पूजा की तैयारी में बिताना चाहिए। हालांकि, पूरे दिन निर्जला व्रत रखने से कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है। अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है, चक्कर आ रहे हैं या आप गर्भवती हैं, तो आराम को नजरअंदाज न करें। डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर या किसी अन्य बीमारी से परेशान महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्रत रखना चाहिए। धार्मिक परंपरा से ज्यादा जरूरी आपकी सेहत है।
OCT 29, 2026 00:30 IST

करवे में क्या-क्या डाला जाता है

करवा चौथ की पूजा में करवा या कलश में शुद्ध जल भरा जाता है। इसके साथ थोड़ी-सी हल्दी, रोली या कुमकुम, साबुत चावल यानी अक्षत, एक सुपारी और एक सिक्का डाल सकते हैं। इन चीजों को शुभता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार करवे के जल में हरी फली, बेर या ककड़ी (काचर) भी डाली जाती है। पूजा के दौरान इसी करवे का इस्तेमाल चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए किया जाता है। हालांकि, करवे में डाली जाने वाली सामग्री अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है।
OCT 28, 2026 23:30 IST

छलनी से ही क्यों देखा जाता है चंद्रमा

करवा चौथ के दिन छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं। करवा की कथा के अनुसार, रानी वीरवती को उनके भाइयों ने छलनी के पीछे दीपक रखकर नकली चांद दिखाया था। वीरावती ने उसे असली चंद्रमा समझकर व्रत खोल लिया, जिसके बाद उनके पति पर संकट आ गया था। इस कथा के कारण करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा देखने की परंपरा शुरू हुई। धार्मिक मान्यता है कि छलनी जिस तरह अनाज से कंकड़ और अशुद्धियां अलग करती है, उसी तरह यह जीवन से नकारात्मकता और बुरी नजर दूर करती है। छलनी की आड़ से चंद्रमा देखने पर उसकी रोशनी सीधे आंखों पर नहीं पड़ती है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी का चांद सीधे आंखों से नहीं देखना चाहिए। एक अन्य मान्यता है कि छलनी में जितने छेद होते हैं, पति की आयु उतनी ही लंबी होती है। चंद्रमा के दर्शन के बाद उसी छलनी से पति का चेहरा देखकर महिलाएं उनके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
OCT 28, 2026 22:30 IST

करवाचौथ के दिन चंद्रमा के साथ किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है

करवा चौथ के दिन महिलाएं मुख्य रूप से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, करवा माता और चंद्रदेव की पूजा करती हैं। माता पार्वती और करवा माता से पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। भगवान शिव की पूजा पति के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होने के कारण पूजा में सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। भगवान कार्तिकेय की पूजा भी शिव परिवार के सदस्य के रूप में की जाती है। शाम को चंद्रमा के दर्शन होने पर चंद्रदेव को जल से अर्घ्य दिया जाता है और पति की लंबी उम्र व दांपत्य जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना के साथ व्रत पूरा किया जाता है।
OCT 28, 2026 21:30 IST

करवा चौथ व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे और एक बेटी थी। बेटी का नाम वीरावती था। सात भाइयों की इकलौती बहन होने के कारण वीरावती सभी की बहुत लाडली थी। उसके भाई उससे बेहद प्यार करते थे और उसकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते थे।
एक बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को साहूकार की पत्नी, उसकी सातों बहुओं और बेटी वीरावती ने करवा चौथ का व्रत रखा। वीरावती ने भी अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। दिनभर भूखी-प्यासी रहने के कारण शाम होते-होते उसकी हालत कमजोर होने लगी।
रात के समय जब वीरावती के सातों भाई भोजन करने बैठे, तो उन्होंने अपनी बहन को भी खाना खाने के लिए कहा। वीरावती ने बताया कि उसने करवा चौथ का व्रत रखा है और वह चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलेगी।
अपनी प्यारी बहन को भूख और प्यास से परेशान देखकर सभी भाई दुखी हो गए। उन्होंने सोचा कि अगर बहन को चंद्रमा के दर्शन करा दिए जाएं, तो वह भोजन कर सकेगी और उसकी परेशानी भी दूर हो जाएगी।
भाइयों ने दिखाया नकली चांद
वीरावती के भाइयों ने उसे भोजन कराने के लिए एक उपाय सोचा। वे घर से बाहर गए और दूर एक पेड़ पर चढ़कर आग जला दी। आग की रोशनी दूर से चंद्रमा जैसी दिखाई देने लगी।
इसके बाद सभी भाई घर लौटे और वीरावती से कहा कि चंद्रमा निकल आया है। अब वह चंद्रदेव को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकती है।
वीरावती ने अपने भाइयों की बात मान ली। उसकी भाभियों ने उसे समझाया कि अभी चंद्रमा नहीं निकला है। उसके भाई उसे भ्रम में डाल रहे हैं, लेकिन वीरावती ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
वह भाइयों के दिखाए प्रकाश को चंद्रमा समझकर अर्घ्य देने पहुंच गई। पूजा करने के बाद उसने भोजन करना शुरू कर दिया।
कथा के अनुसार, वीरावती ने जैसे ही भोजन का पहला निवाला खाया, उसमें बाल निकल आया। दूसरा निवाला खाते समय उसे जोर से छींक आ गई। तीसरा निवाला खाने से पहले ही उसके ससुराल से संदेश आया कि उसके पति की तबीयत बहुत खराब हो गई है।
यह खबर सुनकर वीरावती घबरा गई और तुरंत अपने ससुराल पहुंची। वहां जाकर उसने देखा कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। अपने पति को इस अवस्था में देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगी।
वीरावती को समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। वह अपने पति को दोबारा जीवित करने के लिए भगवान से प्रार्थना करने लगी।
देवी इंद्राणी ने बताया व्रत का महत्व
वीरावती के दुख को देखकर देवी इंद्राणी वहां प्रकट हुईं। उन्होंने वीरावती को बताया कि उसने चंद्रमा निकलने से पहले ही व्रत खोल दिया था। इसी कारण उसके व्रत में बाधा आई और उसे यह दुख सहना पड़ रहा है।
देवी इंद्राणी ने वीरावती को सलाह दी कि वह सच्चे मन से भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करे। साथ ही, अगले करवा चौथ पर पूरे नियम और श्रद्धा के साथ व्रत रखे। देवी ने उसे विश्वास दिलाया कि उसकी सच्ची भक्ति और प्रार्थना से उसके पति को फिर से जीवन मिल सकता है।
वीरावती को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने मन ही मन संकल्प लिया कि वह आगे से करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा और सही विधि से करेगी।
वीरावती ने देवी की बात मानकर भगवान गणेश और करवा माता की आराधना शुरू कर दी। वह हर चतुर्थी पर व्रत करने लगी और अगले साल करवा चौथ आने पर उसने पूरे विधि-विधान के साथ व्रत रखा।
उसने करवा माता से अपने पति के जीवन की प्रार्थना की और चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोला। वीरावती की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश और करवा माता ने उस पर कृपा की। लोकमान्यता के अनुसार, करवा माता के आशीर्वाद से वीरावती के पति को दोबारा जीवन मिल गया। वीरावती अपने पति को जीवित देखकर बहुत खुश हुई। इसके बाद उसने जीवनभर करवा चौथ का व्रत श्रद्धा के साथ करने का संकल्प लिया। कहते हैं कि तभी से करवा चौथ की पूजा में वीरावती की कथा सुनने की परंपरा चली आ रही है।
हे करवा माता! जैसे आपने वीरावती के पति को जीवनदान दिया और उसके सुहाग की रक्षा की, वैसे ही सभी सुहागिन महिलाओं के सुहाग की रक्षा करना। सभी के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनाए रखना और उनके पतियों को लंबी उम्र देना।
करवा माता की जय!
OCT 28, 2026 20:57 IST

करवा चौथ व्रत पारण में क्या-क्या खा सकते हैं

करवा चौथ का व्रत खोलने के बाद सबसे पहले थोड़ा पानी पिएं और फिर हल्का भोजन करें। पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के बाद शुरुआत में नारियल पानी, नींबू पानी या फलों का रस ले सकते हैं। इसके बाद खजूर, बादाम या किशमिश जैसे ड्राई फ्रूट्स और थोड़ी-सी खीर या मिठाई खा सकते हैं। रात के खाने में मूंग दाल की खिचड़ी, दाल-चावल, दलिया, नरम रोटी के साथ हल्की सब्जी या पनीर की सब्जी और दही लेना अच्छा विकल्प है। व्रत खोलते ही बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी भोजन खाने से बचें, क्योंकि इससे पेट में गैस, एसिडिटी या अपच की समस्या हो सकती है। बेहतर है कि थोड़ा-थोड़ा करके खाएं और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी पिएं, ताकि लंबे समय तक भूखे रहने के बाद पाचन पर अचानक ज्यादा दबाव न पड़े।
OCT 28, 2026 19:29 IST

करवा चौथ पर करवा फेरने की रस्म कब करें?

करवा चौथ की पूजा के दौरान कई परिवारों में करवा फेरने की परंपरा निभाई जाती है। इस रस्म में महिलाएं एक-दूसरे के साथ करवा बदलती हैं और पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस रस्म को निभाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। अगर आपके घर में भी करवा फेरने की परंपरा है, तो इसे शाम की पूजा के शुभ मुहूर्त में पूरा कर सकते हैं। पूजा का मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है। इस दौरान रस्म आसानी से पूरी हो सके, इसके लिए करवा, पूजा की थाली, दीपक और बाकी जरूरी सामग्री पहले से तैयार रखें।