त्रेता युग में भगवान श्रीराम की सेवा में रहने वाले पवन पुत्र हनुमान कलियुग में भी जीवित हैं। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों और हिंदू धर्म की मान्यताओं में हनुमान जी को अजर-अमर देवता माना गया है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने उन्हें वरदान दिया था कि वे कलियुग में भी भक्तों के कल्याण के लिए धरती पर निवास करेंगे और राम नाम का कीर्तन करने वाले लोगों को दर्शन देंगे। क्या आप हनुमान जी के दर्शन करने की इच्छा मन में रखते हैं, तो पहले आपको उनके निवास स्थान के बारे में जान लेना चाहिए। जी हां आज हम आपको कलिकाल में हनुमान जी के निवास स्थान के बारे में बताएंगे।
कहां है हनुमान जी का निवास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलियुग में हनुमान जी का निवास स्थान गंधमार्दन पर्वत पर है। महाभारत की कहानियों के मुताबिक भीम को भी हनुमान जी के दर्शन इसी पर्वत पर हुए थे। हालांकि त्रेता और द्वापर युग से जुड़े धार्मिक इतिहास में हनुमान जी के दर्शन का जिक्र है, लेकिन कलियुग में अभी इसका कोई प्रमाण सामने नहीं आ सका है।
कहां है गंधमार्दन पर्वत और इसकी मान्यता क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंधमादन पर्वत हिमालय के कैलाश शिखर के उत्तर में स्थित है। कैलाश जो कि हिमालय का दुर्गम शिखर है, इसे भगवान शंकर का निवास स्थान माना जाता है। महाभारत और स्कंद पुराण में उल्लेख है कि गंधमार्दन यह पर्वत उत्तराखंड और तिब्बत के बीच के क्षेत्र में फैला हुआ है। वहीं कुछ धार्मिक विद्वानों का मत हैं कि यह पर्वत आज भी गुप्त है और आम लोगों की पहुंच से काफी दूर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी आज भी गंधमार्दन पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं, और यहीं कलियुग में उनका निवास माना जाता है।
