Govardhan Puja Katha In Hindi (गोवर्धन पूजा कथा pdf): गोवर्धन पूजा का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। ये पूजा दिवाली के बाद की जाती है। इस साल गोवर्धन पूजा का त्योहार 2 नवंबर 2024 को मनाया जा रहा है। इस दिन पूजा का पूजा प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 06:34 से 08:46 तक रहेगा वहीं सायाह्नकाल मुहूर्त 03:23 से 05:35 बजे तक रहेगा। गोवर्धन पूजा के समय गोवर्धन पर्वत की कथा सुनना या पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें। यहां आप देखेंगे गोवर्धन की कथा के लिरिक्स।
Govardhan Puja Katha In Hindi
गोवर्धन पूजा कथा (Govardhan Puja Katha In Hindi)
गोवर्धन पूजा की कथा अनुसार एक बार देव राज इंद्र को अपनी शक्तियों पर बहुत ज्यादा घमंड हो गया था। तब भगवान कृष्ण ने उनके अहंकार को तोड़ने के लिए एक योजना बनाई। एक बार गोकुल में जब सभी लोग तरह-तरह के पकवान बना रहे थे और हर्षोल्लास के साथ नृत्य-संगीत कर रहे थे। तब भगवान कृष्ण ने अपनी मां यशोदा जी कहा कि आप लोग कौन किस उत्सव की तैयारी में लगे हैं? इस पर मां यशोदा ने कहा कि, बेटा हम देव राज इंद्र की पूजा कर रहे हैं। भगवान कृष्ण ने अपनी माता से भगवान इंद्र की पूजा करने का कारण पूछा। यशोदा मैया ने उन्हें बताया कि, भगवान इंद्र की कृपा से ही हम सभी को अच्छी बारिश मिलती है जिससे हमारे अन्न की पैदावार अच्छी होती है। माता की बात सुनकर भगवान कृष्ण ने कहा कि अगर ऐसा है तब तो हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि यही हमारी गाय चारा चरने जाती हैं और वहां पर लगे पेड़-पौधों की वजह से ही यहां अच्छी बारिश होती है।
भगवान कृष्ण की ये बात गोकुल वासियों को सही लगी। तब सभी इंद्र देव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा में लग गए। जब इंद्र देव को इस बात का पता चला कि गोकुल के लोग उनकी जगह गोवर्धन की पूजा कर रहे है तो उनके बड़ा क्रोध आया। इंद्र देव को ये बात अपमान की तरह प्रतीत हुई। तब उन्होंने अपमान का बदला लेने के लिए मूसलाधार बारिश करनी शुरू कर दी। यह बारिश इतनी विनाशकारी थी कि गोकुल वासियों के घर उजड़ गए। तब भगवान कृष्ण ने सभी को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठाया। जिसके बाद सभी गांव वाले और जावनर इसके नीचे आकर खड़े हो गए।
भगवान इंद्र ने 7 दिनों तक भयंकर बारिश की। लेकिन भगवान कृष्ण के द्वारा उठाए गए गोवर्धन पर्वत के नीचे रहने की वजह से किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ। तब भगवान इंद्र को इस बात का अहसास हुआ कि उनका मुकाबला किसी सामान्य पुरुष से नहीं है। ऐसे में जब उन्हें भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण के बारे में पता चला तो उन्होंने क्षमा याचना मांगी और मुरलीधर की पूजा करके उन्हें इंद्र देव ने भोग भी लगाया। कहते हैं तब से ही गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई।
