Amavasya 2026 Date: 16 या 17 फरवरी, कब है फाल्गुनी अमावस्या, जानिए सही डेट और दान व स्नान का शुभ मुहूर्त
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 16, 2026, 05:49 PM IST
Falguni Amavasya 2026 Kab Hai: फाल्गुन माह की अमावस्या को लेकर लोगों में संशय व्याप्त है। ऐसा इस कारण है क्योंकि इस बार 16 फरवरी की शाम को अमावस्या तिथि शुरू हो रही है और 17 फरवरी को इसका अंत हो रहा है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में फाल्गुनी अमावस्या कब है?
फाल्गुनी अमावस्या कब है?
Falguni Amavasya 2026 Kab Hai: फाल्गुन माह की अमावस्या को लेकर इस बार लोगों के बीच कन्फ्यूजन है कि इसे 16 फरवरी को मनाया जाए या 17 फरवरी को मनाया जाए? इसके पीछे कारण यह है कि पंचांग गणना के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को शाम लगभग 5 बजकर 34 मिनट से हो रही है। यह तिथि 17 फरवरी 2026 को शाम करीब 5 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत और पर्व ‘उदयातिथि’ के आधार पर मान्य होते हैं, लेकिन अमावस्या और पूर्णिमा में जब यह तिथि सूर्यास्त के व्याप्त हो, उस दिन रात्रि की पूजा की जाती है।
कब है फाल्गुनी अमावस्या 2026 ( Kab Hai Falguni Amavasya 2026)?
16 फरवरी के दिन शाम लगभग 5 बजकर 34 मिनट पर अमावस्या तिथि शुरू होगी। इस कारण अमावस्या की रात्रि पूजा 16 फरवरी के दिन ही की जाएगी। वहीं, फाल्गुनी अमावस्या का स्नान और दान 17 फरवरी 2026 को किया जाएगा। 17 फरवरी की सुबह सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए फाल्गुनी अमावस्या का पूजन 17 फरवरी 2026, मंगलवार को ही किया जाएगा। 18 फरवरी को अमावस्या तिथि नहीं रहेगी, इसलिए उस दिन अमावस्या का स्नान-दान नहीं किया जाएगा।
फाल्गुनी अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग
17 फरवरी 2026 को अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का भी योग बन रहा है। खगोलीय जानकारी के अनुसार यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण है। अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसी NASA के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के कुछ क्षेत्रों में दृश्य रहेगा।
क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के नियम उसी स्थान पर लागू होते हैं, जहां ग्रहण दिखाई देता है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसके साथ ही मंदिरों के पट बंद करने की आवश्यकता नहीं होगी। नियमित पूजा-पाठ जारी रहेगा। अमावस्या का स्नान-दान सामान्य रूप से किया जा सकेगा।
फाल्गुनी अमावस्या 2026 पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त?
फाल्गुनी अमावस्या 17 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। अमावस्या पर किया गया दान कई गुना फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं स्नान और दान का सही समय, क्या दान करें और स्नान कैसे करें।
अमावस्या के दिन स्नान का सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय के बाद तक माना जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त लगभग सुबह 4:30 बजे से 5:30 बजे तक रहेगा। सूर्योदय के बाद से पूर्वाह्न (दोपहर से पहले) तक भी स्नान किया जा सकता है। यदि संभव हो तो पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर स्नान करें। अगर बाहर जाना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में पवित्र नदी का जल डालकर स्नान कर सकते हैं।
फाल्गुनी अमावस्या पर स्नान कैसे करें?
सुबह जल्दी उठें। स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। जल में काले तिल डालना भी शुभ माना जाता है। स्नान करते समय पितरों का स्मरण करें। स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें। सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
फाल्गुनी अमावस्या पर दान का शुभ समय
दान का श्रेष्ठ समय सुबह स्नान के बाद से लेकर दोपहर तक माना जाता है। पितृ तर्पण के लिए मध्याह्न का समय विशेष शुभ माना गया है। अभिजीत काल दोपहर 12:13 से दोपहर 12:58 तक में भी दान करना अच्छा माना जाता है।
फाल्गुनी अमावस्या पर क्या दान करें?
फाल्गुनी अमावस्या पर इन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन आप काले तिल, गुड़, चावल, आटा, कंबल या वस्त्र, अन्न और भोजन, जरूरतमंदों को धन व पितरों की शांति के लिए तिल और जल से तर्पण करना विशेष फलदायी माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
