एक साल में तीन बार नव वर्ष क्यों मनाते हैं हम, जानें जनवरी, चैत्र और वैशाख के नए साल का अंतर

India New Year Traditions: भारत विविधताओं से भरा देश है, यहां केवल खानपान और परंपराएं ही अलग नहीं है, बल्कि यहां नववर्ष के भी अलग-अलग दिखते हैं। आइए जानते हैं साल में तीन बार क्यों मनाया जाता है नया साल?

India New Year Traditions: भारत में अलग-अलग भाषा, खानपान, परंपरा देखने को मिलती हैं, यही कारण है कि भारत को विविधताओं से भरा देश कहा जाता है। इसके साथ ही भारत में अलग-अलग पर्व और त्योहार देखने को मिलते हैं। जिन्हें मनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। यही कारण है कि भारत में एक ही साल में एक नहीं, बल्कि तीन-तीन बार नव वर्ष मनाया जाता है। जनवरी, चैत्र और वैशाख के महीनों में नया साल सेलिब्रेट किया जाता है। इन तीनों नए साल (Multiple New Years) के पीछे अलग-अलग आधार, मान्यताएं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जुड़े हुए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर हम साल में तीन बार नया साल क्यों मनाते हैं और इन तीनों में क्या अंतर है?

India New Year Traditions

भारत में तीन बार क्यों मनाते हैं नया साल?

जनवरी का नया साल

हर साल 1 जनवरी को मनाया जाने वाला नया साल पूरी दुनिया में सबसे अधिक लोकप्रिय है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है, जिसे 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने लागू किया था। आज इस कैलेंडर की मान्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है और सभी सरकारी, व्यावसायिक और शैक्षणिक कार्य इसी के अनुसार चलते हैं। भारत में भी 1 जनवरी के दिन नया साल सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन भारत में इस नववर्ष का कोई सांस्कृतिक जुड़ाव नहीं है। लेकिन आधुनिकता और वैश्वीकरण की चाल में इस नववर्ष का चलन भारत सहित दुनिया भर में है।

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