Dooj Kab Ki Hai September 2026: अमावस्या के बाद चंद्रमा की बढ़ती कलाओं के साथ शुक्ल पक्ष शुरू होता है। शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि को द्वितीया या दूज कहा जाता है। सितंबर 2026 में दूज की तारीख को लेकर 12 और 13 सितंबर का भ्रम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि द्वितीया तिथि 12 सितंबर को शुरू होगी, लेकिन सूर्योदय के समय यह तिथि 13 सितंबर को रहेगी।
सितंबर की दूज कब है, 12 या 13 में कब पड़ेगी भादो शुक्ल द्वितीया तिथि
हिंदू पंचांग में व्रत और पर्व की तारीख तय करते समय सामान्य रूप से उदया तिथि को प्राथमिकता दी जाती है। इस नियम के अनुसार सितंबर 2026 की शुक्ल पक्ष की दूज रविवार, 13 सितंबर 2026 को मानी जाएगी।
सितंबर 2026 में दूज कब है
सितंबर महीने में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 13 सितंबर 2026, रविवार को रहेगी। हालांकि द्वितीया तिथि का आरंभ एक दिन पहले यानी 12 सितंबर की सुबह हो जाएगा।
दृक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में, द्वितीया तिथि का समय इस प्रकार है
| दूज तिथि | तारीख और समय |
|---|---|
| द्वितीया तिथि प्रारंभ | 12 सितंबर 2026, सुबह 7:46 बजे |
| द्वितीया तिथि समाप्त | 13 सितंबर 2026, सुबह 7:08 बजे |
| उदया तिथि के अनुसार दूज | 13 सितंबर 2026, रविवार |
अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और तिथि के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
दूज 12 या 13 सितंबर को है
द्वितीया तिथि 12 सितंबर को सुबह 7:46 बजे शुरू होगी। यानी इस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि रहेगी। अगले दिन 13 सितंबर को सूर्योदय द्वितीया तिथि में होगा। इसी कारण उदया तिथि के नियम से दूज 13 सितंबर को मानी जाएगी।
यदि किसी घर में पूजा या पारिवारिक परंपरा तिथि के प्रवेश के अनुसार निभाई जाती है, तो 12 सितंबर को द्वितीया शुरू होने के बाद पूजा की जा सकती है। हालांकि दूज की मुख्य तारीख 13 सितंबर रहेगी।
दूज तिथि का धार्मिक महत्व
द्वितीया चंद्र मास की दूसरी तिथि है। यह तिथि हर महीने दो बार आती है- एक बार शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार कृष्ण पक्ष में। शुक्ल पक्ष की द्वितीया नई शुरुआत, चंद्र दर्शन और सकारात्मक संकल्प से जुड़ी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना शुभ होता है। अमावस्या के बाद दिखाई देने वाला चंद्रमा बहुत पतला होता है। इसे देखकर मन में सुख, शांति और उन्नति की प्रार्थना की जाती है। कुछ क्षेत्रों में महिलाएं द्वितीया तिथि पर चंद्रमा को जल या अर्घ्य भी अर्पित करती हैं।
सितंबर की दूज पर किसकी पूजा करें
दूज के दिन सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाया जा सकता है। भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शाम को चंद्र दर्शन होने पर जल अर्पित करें। सफेद फूल, चावल, दूध या दूध से बनी मिठाई चढ़ाई जा सकती है।
पूजा के दौरान ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र का 11 या 21 बार जाप किया जा सकता है। मान्यता है कि चंद्रदेव की उपासना से मन शांत होता है और परिवार में प्रेम बढ़ता है।
क्या सितंबर की दूज पर भाई दूज मनाई जाएगी
सितंबर में आने वाली यह सामान्य शुक्ल पक्ष द्वितीया है। इसे दीपावली के बाद आने वाली भाई दूज न समझें। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है। सितंबर 2026 की दूज पर भाई दूज का त्योहार नहीं होगा।
