August 2026 Mei Panchak Kab Se Hai : 27 अगस्त 2026, गुरुवार की दोपहर 1 बजकर 35 मिनट पर चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा के कुंभ में आते ही पंचक शुरू हो जाएगा। यह पंचक 1 सितंबर की सुबह तक रहेगा। इसी पंचक के बीच 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। पंचक की शुरुआत गुरुवार से होने के कारण इसे लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में अलग मत हैं।
चंद्रमा 29 अगस्त की रात 9 बजकर 37 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे और 1 सितंबर की सुबह 3 बजकर 33 मिनट पर मेष राशि में चले जाएंगे। चंद्रमा के मेष राशि में प्रवेश के साथ पंचक की अवधि समाप्त हो जाएगी। इस दौरान चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम चरण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरेंगे। इन्हीं पांच नक्षत्रों में चंद्रमा के गोचर को पंचक कहा जाता है।
क्या है इस पंचक का नाम
पंचक का नाम उसके शुरू होने वाले वार के आधार पर तय होता है। रविवार से शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक माना जाता है। वहीं, बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक को अशुभ नहीं माना जाता है, इसको दोषरहित पंचक कहा जाता है।
पंचक क्यों लगता है
पंचक की पूरी ज्योतिषीय संरचना इन पांच नक्षत्रों से बनती है। जब चंद्रमा इन नक्षत्रों में गोचर करता है, तब पंचक शुरू होते हैं।
धनिष्ठा
पंचक की शुरुआत धनिष्ठा के तीसरे चरण से होती है। धनिष्ठा को मंगल से संबंधित नक्षत्र माना जाता है। इसमें ऊर्जा, सक्रियता और गति का तत्व मजबूत माना जाता है।
शतभिषा
इसके बाद चंद्रमा शतभिषा में जाता है। इसका संबंध राहु से माना जाता है। शतभिषा का संबंध रहस्य, शोध, उपचार और भीतर छिपी चीजों को सामने लाने से जोड़ा जाता है।
पूर्वाभाद्रपद
यह गुरु के स्वामित्व वाला नक्षत्र माना जाता है। आध्यात्मिकता, गहराई और परिवर्तन इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं।
उत्तराभाद्रपद
इस नक्षत्र का स्वामी भी शनि माना जाता है। धैर्य, स्थिरता और गंभीरता इसके प्रमुख गुण हैं।
रेवती
पंचक का अंतिम नक्षत्र रेवती है, जिसका स्वामी बुध है। इसे यात्रा, मार्गदर्शन, संरक्षण और संक्रमण से जोड़कर देखा जाता है।
इस तरह पंचक के करीब पांच दिनों में चंद्रमा अलग-अलग ग्रह स्वामित्व वाले नक्षत्रों से गुजरता है।
पंचक में क्या नहीं करना चाहिए
नहीं ये पंचक दोषरहित पंचक है। इस कारण यह ज्यादा अशुभ नहीं रहेगा। हालांकि, फिर भी पंचक में कुछ विशेष कार्य करने से बचना चाहिए। खासकर इस दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी या ईंधन का संग्रह, छत डालने या ढकने का काम, खाट या चारपाई बनाना और कुछ निर्माण संबंधी कार्यों को टालना चाहिए।
क्या इस पंचक में राखी बांध सकते हैं
पंचक के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान, दान, धार्मिक अध्ययन और भगवान की उपासना की जा सकती है। पंचक में रक्षाबंधन भी पड़ेगा। इस कारण पंचक के दौरान राखी का त्योहार मनाने की मनाही नहीं है। पंचक में राखी बांधी जा सकती है। इस दौरान जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूसरी उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
