Anant Chaturdashi Vrat Katha: अनंत चतुर्दशी व्रत कथा, इस पौराणिक कहानी से जानें क्यो मनाई जाती है अनंत चतुर्दशी

Anant Chaturdashi Vrat Katha In Hindi (अनंत चतुर्दशी व्रत कथा लिखित में): हर साल भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूरी श्रद्धा से पूजा करने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यहां से आप अनंत चतुर्दशी की कथा पढ़ सकते हैं और इसके महत्व के बारे में जान सकते हैं।

Anant Chaturdashi Vrat Katha In Hindi (अनंत चतुर्दशी व्रत कथा लिखित में): अनंत चतुर्दशी के व्रत का शास्‍त्रों में बहुत ही खास महत्‍व बताया गया है। इस खास व्रत में भगवान विष्‍णु के अनंत स्‍वरूप की पूजा होती है और बाजू पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। इस दिन गणेश विसर्जन भी होता है, जिससे यह दिन और भी विशेष हो जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी का त्योहार आज यानी 6 सितंबर 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णू, मां लक्ष्मी और गणपति जी की पूजा करेंगे। इस पूजा के साथ कथा पाठ करने का भी खास महत्व है। इसलिए आपको यहां दी गई अनंत चतुर्दशी की कथा जरूर पढ़ लेनी चाहिए।

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा (AI Generated)

Anant Chaudas Katha In Hindi (अनंत चौदस की कहानी)-

अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा अनुसार एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। यज्ञ के मंडप में जल की जगह स्थल तो स्थल की जगह जल की भ्रांति होती थी। इसी के चलते दुर्योधन एक स्थल को देखकर जल कुण्ड में जाकर गिर गए। जब द्रौपदी ने यह देखा तो उनका उपहास करते हुए बोलीं कि अंधे की संतान भी अंधी होती है। इस कटुवचन को सुनकर दुर्योधन बहुत आहत हो गए और अपने अपमान का बदला लेने हेतु उसने युधिष्ठिर को द्युत यानी जुआ खेलने के लिए बुला लिया। वहां, छल से जीत हासिल करके पांडवों को 12 वर्ष का वनवास दे दिया।

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