अध्यात्म

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025: आज या कल, कब है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी? जानें पौष महीने की पहली चतुर्थी की सही तारीख और पूजा के नियम

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी गणेश भगवान को समर्पित एक विशेष संकष्टी चतुर्थी है, जो मार्गशीर्ष महीने में आती है। इस दिन भगवान गणेश के अखुरथ स्वरूप की पूजा होती है। तो इस साल अखुरथ संकष्टी चतुर्थी किस दिन है, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां चतुर्थी की सही तारीख के साथ-साथ पूजा के नियमों के बारे में भी बताया गया है।

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अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 (pic credit: canva)

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025: पौष कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। ये साल की आखिरी चतुर्थी होती है। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की पूजा की जाती है। साथ ही कुछ खास मंत्रों का जाप और कथा भी पढ़ी जाती है। मान्यताओं अनुसार इस संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और धन, यश, वैभव के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, दिसंबर में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी कब है, इस बात को लेकर काफी कंफ्यूजन है। इसकी तारीख आप यहां से जान सकते हैं।

कब है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी?

साल 2025 में संकष्टी तिथि 7 दिसंबर की शाम 6:24 बजे शुरू हो रही है। ऐसे में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 में रविवार, 7 दिसंबर को मनाया जाएगा।

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त-

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी की पूजा करने के लिए लगभग सुबह 8:19 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। वहीं, इस दिन चांद निकलने का समय शाम में 7 बजकर 55 मिनट है।

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि-

गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद गणेश जी की पूजा की तैयारी करें। फिर गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजों जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं। इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और गणेश जी की आरती करें। फिर शाम में फिर से गणेश जी की पूजा की जाती है। साथ ही चांद की भी पूजा होती है। शाम की पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति के पास माता दुर्गा की भी फोटो या मूर्ति रखें। इसके बाद भगवान की प्रतिमा के समक्ष धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएं। साथ ही फुल अर्पित करें और प्रसाद में केला, नारियल रखें। गणेश जी को मोदक जरूर अर्पित करें। इस दिन तिल या गुड़ के मोदक भी बनाये जाते है। गणेश जी के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद संकष्टी चतुर्थी की कथा सुने और अंत में आरती करें। फिर चंद्रोदय के बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पित करें। साथ में फूल, चन्दन, चावल चढ़ाएं। पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सभी में बांट दें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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