22 September 2024 Panchang In Hindi (22 सितंबर 2024 आज का पंचांग): आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर होगा। इस दिन व्याघात योग रहेगा। आज के दिन अभिजीत मुहूर्त 11:55 से लेकर 12:23 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करना शुभ होगा। पंचमी तिथि के दिन राहुकाल का समय सायंकाल 04.30 बजे से 06 बजे तक रहेगा। राहुकाल के समय में कोई भी शुभ काम ना करें। अब जानिए आज का पूरा पंचांग।
22 September 2024 Panchang In Hindi (22 सितंबर 2024 आज का पंचांग)
संवत-पिङ्गला विक्रम संवत 2081माह-आश्विन ,कृष्ण पक्ष
तिथि- पंचमी, व्रत- पितृ पक्ष श्राद्ध पंचमी
दिवस-रविवार
सूर्योदय-06:07am
सूर्यास्त-06:38pm
नक्षत्र- भरणी
चन्द्र राशि -मेष राशि,स्वामी ग्रह-मङ्गल
सूर्य राशि- कन्या राशि,स्वामी ग्रह -बुध
करण= बालव
योग:- व्याघात
शुभ मुहूर्त
1अभिजीत-11:55pm से 12:23 pm तक2विजय मुहूर्त-02:29pm से 03:21 pm तक
3गोधुली मुहूर्त-06:20pm से 07:20 pm तक
4 ब्रम्ह मुहूर्त-4:04m से 05:05am तक
5अमृत काल-06:06am से 07;51am तक
6निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:47 से 12:21तक रात
संध्या पूजन-06:21 pm से 07:04pm तक
दिशा शूल -पूर्व दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं,यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल-सायंकाल 04.30 बजे से 06 बजे तक
क्या करें-आश्विन माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है।पितृ पक्ष चल रहा है। आज पंचमी श्राद्ध दिवस है। अपने पितरों का श्राद्ध अवश्य करें। आज साप्ताहिक रविवार व्रत रख सकते हैं। सूर्योपासना करें। भगवान सूर्य कल्याणकारी व पालनकर्ता हैं। वह संकटों का नाश करते हैं। सूर्य उपासना से सूर्य व मंगल ग्रह शांत रहते हैं। दिन भर उपवास में भगवान भास्कर जी की उपासना की जाती है। आज संकल्प करें कि हम धार्मिक ज्ञान प्राप्त करेंगे। कुछ संत निराजल व्रत रखकर उपासना करते हैं। व सायंकाल भोजन वो भी फलाहार व्रत रखते हैं। श्री आदित्यहृदय स्तोत्र का 03 पाठ करें। आज आपका भोजन फलाहारी हो।कोई बड़ा धार्मिक अनुष्ठान कराएं।शरीर स्वस्थ रखने के लिए हनुमान बाहुक का पाठ भी करें। पितृ पक्ष में श्री मद्भागवत कथा व गीता का श्रवण करें। पितृ पक्ष में नियमित पितरों का श्राद्ध करें । गाय को रोटी,गुड़ व भोजन दें।कौवे को नित्य भोजन दें। श्राद्ध पक्ष में नियमित तर्पण करें व तिथि के दिन श्राद्ध अवश्य करें। पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
क्या न करें-पुरखों का श्राद्ध अवश्य करें।
