अध्यात्म

13 महीने का होगा साल 2026, 60 दिन का 1 महीना, जानें क्यों बिगड़ रहा है पूरा हिसाब

Adhik Maas 2026 Mein Kab Hai: नया साल आने वाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आने वाला साल 12 की जगह 13 महीने का होने वाला है। ऐसा कैसे और क्यों होगा, इसके बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं। साथ ही यहां ये एक्सट्रा महीने की तारीख भी बताई गई है।

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13 महीने का होगा साल 2026 (pic credit: canva)

Adhik Maas 2026 Mein Kab Hai: अंग्रेजी कैलेंडर में जहां 1 जनवरी को नए साल की शुरुआत होती है, वहीं हिंदू पंचांग में समय की गणना विक्रम संवत के आधार पर की जाती है, इसलिए अभी विक्रम संवत का 2082 वर्ष चल रहा है। हिंदू पंचांग में लगभग हर तीसरे साल एक एक्सट्रा महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं। अब नया साल आने वाला है और साल 2026 के हिंदू पंचांग में एक बहुत ही दुर्लभ और खास खगोलीय घटना घटित होने वाली है। साल 2026 भी अधिकमास ही है। तो आइये इसके बारे में यहां विस्तार से जानते हैं।

2026 में कौन सा महीना बढ़ रहा है?

नए साल में ज्येष्ठ महीना बढ़ रहा है। साल 2026 में एक की जगह दो-दो ज्येष्ठ महीने रहेंगे। एक सामान्य ज्येष्ठ और एक अधिक ज्येष्ठ, अधिकमास जुड़ने की वजह से इस बार ज्येष्ठ का समय लगभग 58 से 59 दिनों तक रहेगा। अधिकमास को ही मलमास भी कहा जाता है और इसे विशेष धार्मिक कर्मों के लिए पवित्र माना जाता है यानी, विक्रम संवत पंचांग के मुताबिक 2083 वर्ष में 13 महीने होंगे।

2026 में अधिकमास कब से कब तक रहेगा?

ज्येष्ठ माह की शुरुआत 22 मई से 29 जून 2026 तक रहेगी, इसी बीच अधिकमास 17 मई 2026 से शुरू होगा और इसका समापन 15 जून 2026 को होगा। यानी अगले साल यानी साल 2026 में अधिकमास 17 मई, रविवार को शुरू होकर 15 जून, सोमवार तक रहेगा।

अधिकमास क्या होता है?

अधिकमास हिंदू पंचांग में एक विशेष मास होता है जो तब आता है जब किसी महीने में सूर्य किसी राशि में प्रवेश नहीं करता। ये स्थिति इसलिए होती है क्योंकि चंद्र मास और सौर मास में अंतर होता है, जिससे हर 2-3 साल में एक एक्सट्रा मास जुड़ जाता है। इसे अध्याय मास भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से अधिकमास को बहुत शुभ माना जाता है और इस मास में किए गए व्रत, पूजा, दान और अन्य धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है।

अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए?

अधिकमास, हिंदू पंचांग में हर 2-3 साल में एक बार आता है और इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। यह महीना विशेष रूप से पुण्य कमाने, धार्मिक कर्म करने और आत्मशुद्धि के लिए उपयुक्त होता है। शास्त्रों के अनुसार इस मास में व्रत, पूजा, दान और जप जैसे धार्मिक कर्म बढ़ाने चाहिए, लेकिन कुछ चीज़ों से बचने की सलाह दी जाती है। जैसे कि विवाह, नया व्यवसाय या घर बनाने जैसे बड़े निर्णय और अनुष्ठान इस मास में करने से बचना चाहिए क्योंकि इसे अविवाहित कार्यों के लिए असमय माना जाता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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