सूर्य की सतह पर एक विशालकाय गड्ढा बन गया है जिसकी चौड़ाई इतनी ज्यादा है कि उसमें 62 से अधिक पृथ्वी समा सकती हैं। इन विशालकाय गड्ढों को कोरोनल होल कहा जाता है, जहां से तीव्र गति से चलने वाली सोलर विंड प्रवाहित होती है। (फोटो साभार: NASA)
Coronal Hole: स्पेसवेदर डॉट कॉम के मुताबिक, कोरोनाल होल ऐसे क्षेत्र हैं जहां सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र खुल गए हैं, जिसकी वजह से बिना किसी रोकटोक के सोलर विंड अंतरिक्ष में प्रवाहित होती है। ऐसे क्षेत्र पराबैंगनी छवियों में गहरे दिखाई देते हैं। (फोटो साभार: NASA)
Solar Wind: लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनल होल से निकलने वाली सोलर विंड, जिन्हें सौर हवा भी कहा जाता है, 500 किमी प्रति सेकंड से भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। बकौल रिपोर्ट, सोलर विंड के पृथ्वी पर पहुंचने पर भू-चुंबकीय तूफान की स्थिति पैदा हो सकती है। (फोटो साभार: NASA)
Solar Wind Alert: सोलर विंड के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने की वजह से सैटेलाइट, रेडियो कम्युनिकेशन और बिजली ग्रिड ठप हो सकते हैं जिसकी वजह से बिजली की आपूर्ति बाधित हो सकती है। (फोटो साभार: NASA)
Aurora: सोलर विंड के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आने से ऑरोरा उत्पन्न होती है। सूर्य से आने वाले आवेशित कण ऊपरी वायुमंडल में मौजूद गैसों से टकराते हैं जिससे उनमें ऊर्जा स्थानांतरित होती है। यह ऊर्जा प्रकाश के रूप में निकलती है। जिसकी वजह से रात के समय हमें नार्दन लाइट्स देखने को मिलती है। (फोटो साभार: NASA)
सूर्य की सतह पर कोरोनल होल कब तक रहेगा? इसके बारे में पुख्ता तौर पर वैज्ञानिक भी नहीं बता पा रहे हैं। ऐसे में जब तक कोरोनल होल बना रहेगा तब तक उसका असर दिखाई देगा। हाल ही में एक फरवरी को ऑरोरा का अलर्ट जारी हुआ है। (फोटो साभार: NASA)