Netaji Subhas Chandra Bose: कहां रखी हैं नेताजी की अस्थियां, कैसे हुई थी मौत? 7 तस्वीरों में जानिए सबकुछ

Netaji Subhas Chandra Bose: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के मौके पर उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने एक बार फिर भारत सरकार से अपील की है कि नेताजी की अस्थियां, जिन्हें लगभग 80 साल से जापान के रैंकोजी मन्दिर (Renkoji Temple) में रखा गया है, भारत वापस लाया जाए। वह चाहती हैं कि उनका अंतिम संस्कार भारत में सम्मानपूर्वक हो और इसके लिए उन्होंने भारतीयों से समर्थन की भी अपील की है। परिवार कुछ समय से DNA टेस्ट कराने की भी मांग कर रहा है ताकि वैज्ञानिक रूप से पुष्टि हो सके कि अस्थियाँ वास्तव में नेताजी की हैं, जिन्हें ताइपे में 1945 के विमान दुर्घटना में अपनी मृत्यु के बाद रखा गया था।

Produced by: पीयूष कुमारUpdated Jan 23 2026, 13:24 IST
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” ​01 / 07

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” ​

नेताजी सुभाष चंद्र बोस महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था। वह आज़ाद हिंद फौज के प्रमुख नेता थे जिनका नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” आज भी प्रेरणा है।

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बेटी ने क्या किया अनुरोध?​

23 जनवरी 2026 को नेताजी की 129वीं जयंती के अवसर पर उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने केंद्र से मांग की कि उनके पिता की अस्थियां जापान से भारत लाई जाएं।

03 / 07Photo : Tokyo Travels

​​अस्थियां कहां रखी हैं?​

नेताजी की अस्थियां आज भी टोक्यो, जापान के रौंकोजी मंदिर (Renkoji Temple) में सुरक्षित रखी हैं। उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने भारत सरकार से इन अवशेषों को देश लौटाने की मांग दोबारा की है।

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​​कैसे हुई थी मौत?​

व्यापक मान्यता के अनुसार नेताजी 18 अगस्त 1945 को ताइपे, ताइवान में एक विमान दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में वहीं उनकी मृत्यु हो गई थी।

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मृत्यु की जांच और रहस्य​

नेताजी की मौत को लेकर कई दृष्टिकोण रहे हैं। कुछ आयोगों ने विमान दुर्घटना को मौत का कारण माना, जबकि अन्य जांच रिपोर्टों और परिवार के सदस्यों ने सवाल उठाए हैं, जिससे यह विषय आज भी रहस्यपूर्ण है।

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​​डीएनए (DNA) टेस्ट की मांग​

नेताजी के परिवार ने DNA टेस्ट की भी मांग की है ताकि पुष्टि हो सके कि Renkoji Temple में रखी अस्थियाँ वास्तव में नेताजी की ही हैं। जापानी सरकार ने भी तकनीकी रूप से सहयोग की बात कही है।

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​​बेटी की भावुक अपील​

अनीता बोस फाफ ने कहा है कि उनके पिता का अंतिम सम्मान भारत में होना चाहिए और देशवासियों को इस मांग का समर्थन करना चाहिए, ताकि नेताजी को भारत में सम्मानपूर्वक विदाई दी जा सके।