Budhapa Par Shayari: हम हर पल अतीत हो रहे हैं... ढलती उम्र पर शायरों के कुछ बेहतरीन अल्फाज, पढ़ें बुढ़ापे पर शायरी

Umar Par Shayari In Hindi (ढलती उम्र पर शायरी): बचपन से बुढ़ापे तक का सफर देखते ही देखते निकल जाता है। इस दौरान इंसान कई तरह के उतार-चढ़ाव से गुजरता है। बढ़ती उम्र के साथ कुछ परेशानियां भी आती हैं। बुढ़ापे या यूं कहें ढलती उम्र को लेकर शायरों ने भी बेहद खूबसूरत शेर और शायरी लिखी है, यहां से आप इसे पढ़ सकते हैं।

Umar Par Shayari In Hindi (ढलती उम्र पर शायरी): कहते हैं बहती नदी और ढलती उम्र को रोकना किसी के बस में नहीं है। आज जवानी तो कल बुढ़ापा लिखित है। किसी के लिए बढ़ती उम्र नई जिंदगी की शुरुआत लेकर आता है तो किसी के चेहरे पर मायुसी। अक्सर देखा जाता है कि जो मां-बाप अपने बच्चों को काबित बना देते हैं, वही बच्चे बुजुर्ग मां-बाप का हाथ छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के लिए बुढ़ापा तो किसी अभिशाप से कम नहीं होता। बुढ़ापे के इसी मंजर को देखते हुए शायरों ने भी अपनी कलम से कुछ अल्फाज लिख डाले हैं। आप इन्हें यहां पढ़ सकते हैं-

Umar Par Shayari In Hindi

Old Age Shayari On Badhti Umar-

1) फिसल पर वक्त के फर्श पर उम्र ढल जाती है,

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