Umar Par Shayari In Hindi (ढलती उम्र पर शायरी): कहते हैं बहती नदी और ढलती उम्र को रोकना किसी के बस में नहीं है। आज जवानी तो कल बुढ़ापा लिखित है। किसी के लिए बढ़ती उम्र नई जिंदगी की शुरुआत लेकर आता है तो किसी के चेहरे पर मायुसी। अक्सर देखा जाता है कि जो मां-बाप अपने बच्चों को काबित बना देते हैं, वही बच्चे बुजुर्ग मां-बाप का हाथ छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के लिए बुढ़ापा तो किसी अभिशाप से कम नहीं होता। बुढ़ापे के इसी मंजर को देखते हुए शायरों ने भी अपनी कलम से कुछ अल्फाज लिख डाले हैं। आप इन्हें यहां पढ़ सकते हैं-
Old Age Shayari On Badhti Umar-
1) फिसल पर वक्त के फर्श पर उम्र ढल जाती है,
कई बार बिना जिए भी जिंदगी गुजर जाती है।
2) तारीखों में धीरे-धीरे व्यतीत हो रहे हैं हम,
आज हैं लेकिन हर पल अतीत हो रहे हैं हम।
3) उम्र बिता दिया हमने बच्चों की फिक्र करने में,
अब बच्चे व्यस्त हैं हमारी कमियों का जिक्र करने में।
4) वक्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
आदत इसकी भी आदमी सी है।
5) लड़कपन खेल में खोया,
जवानी नींद भर सोया,
बुढ़ापा देखकर रोया।
6) कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं,
जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला।
7) सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा,
मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर।
8) दस्तक तो बहुत दे रहा है बुढ़ापा,
पर ज़िद है कि हम दरवाज़ा न खोलेंगे।
9) मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ,
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में।
10) तमाम उम्र खुशी की तलाश में गुजरी,
तमाम उम्र तरसते रहे खुशी के लिए।
