Taj Mahal: ताजमहल ना सिर्फ आगरा बल्कि पूरे हिंदुस्तान का गौरव है। आज भी ताज महल दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शुमार है। इसे मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। ताज महल का निर्माण कार्य साल 1632 में शुरू हुआ था और इसे पूरा बनने में लगभग 22 साल लगे। माना जाता है कि मुख्य मकबरा करीब 1648 तक बनकर तैयार हो गया था, जबकि आसपास की इमारतों और सजावट का काम 1653 तक चलता रहा।
भयंकर गर्मी से बचने को कौन सी मिठाई खाते थे ताजमहल के मजदूर (AI Image)
20 हजार मजदूरों और कारीगरों की मेहनत है ताजमहल
इतिहासकारों के अनुसार ताज महल के निर्माण में करीब 20 हजार मजदूरों और कारीगरों ने काम किया था। इनमें भारत के अलावा फारस, तुर्की और मध्य एशिया के कलाकार और शिल्पकार भी शामिल थे। उनके कुशल हाथों से संगमरमर पर की गई नक्काशी, बेशकीमती पत्थरों की जड़ाई और शानदार वास्तुकला आज भी लोगों को हैरान कर देती है।
भीषण गर्मी में भी नहीं रुकता काम
ताजमहल को पूरा करने के लिए 22 सालों तक मजदूर दिन रात काम करते रहे। उन दिनों गर्मियों के मौसम में आगरा बहुत ज्यादा गर्म हो जाया करता था। गर्मी में मजदूरी करने से हर साल बड़ी संख्या में मजदूर बीमार पड़ जाते। इससे काम की रफ्तार पर भी ब्रेक लगता। बताया जाता है कि शाहजहां के फरमान पर ऐसे मिठाई की ईजाद की गई जो मजदूरों के लिए मीठे का काम भी करे और उन्हें गर्मी से राहत भी दे।
कौन सी मिठाई खाते थे मजदूर
आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी कौन सी मिठाई थी। बता दें कि शाहजहां के हुक्म की तामील करते हुए वहां के खानसामों ने पेठे के फल से बनने वाली पेठा मिठाई तैयार की। यही पेठा खाकर ताजमहल बनाने वाले कामगर गर्मी में खुद को दुरुस्त रखते थे।
इस बात की तस्दीक बहुत से इतिहासकार करते हैं। वरिष्ठ इतिहासकार राजकिशोर की मानें तो गर्मी से मजदूर परेशान और कमजोर हो जाते थे। ताज महल बनाने वाले मजदूरों को एनर्जी बूस्टर के तौर पर शाहजहां ने पेठा देने का फरमान दिया था। दरअसल पेठे की तासीर ठंडी होती है और इसमें भरपूर मात्रा में ग्लूकोज भी होता है। यह गर्मी में शरीर को डिहाइड्रेट नहीं होने देता था। पेठे से मजदूरों गर्मी में स्वस्थ भी रहते और और उन्हें मिठाई का स्वाद भी मिलता।
क्यों खास है पेठा
पेठे का इतिहास जो भी रहा हो लेकिन इस बात से इनकार तो नहीं किया जा सकता है कि स्वाद के मामले में पेठे का कोई जोड़ नहीं है। यह ऐसी मिठाई है जिसे बनाना जितना आसान है उतना ही ज्यादा यह सेहत के लिए लाभकारी भी है। पेठे की खास बात ये है कि इसमें काजू बादाम केसर जैसे महंगे ड्राई फ्रूट इस्तेमाल नहीं होते जिस कारण इसकी कीमत भी बाजार में दूसरी मिठाइयों के मुकाबले बहुत कम है। आज यह पेठा आगरा की पहचान बन चुका है। सिर्फ आगरा में ही करीब 56 तरह के पेठे बनते हैं। हर तरह के पेठे का अपना स्वाद।
