Sawan Shayari Love (सावन पर शायरी): सावन दस्तक दे चुका है। बारिश की फुहारों में लिपटा ये महीना अपनी आमद के साथ ही मौसम का मिजाज बदल देता है। काले बादल, रिमझिम बारिश, भीगे घर -आंगन और मिट्टी की सोंधी खुशबू मन को एक अलग ही दुनिया में ले जाती हैं। भारतीय साहित्य में सावन को प्रेम, विरह, इंतजार और यादों का मौसम माना गया है। यही वजह है कि हिंदी और उर्दू के अनगिनत कवियों और शायरों ने सावन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। कभी यह मिलन का संदेश लेकर आता है तो कभी बिछड़ने का दर्द और भी गहरा कर देता है।
सावन पर शायरी
ऐसे ही शायरों में एक नाम गोपालदास नीरज का भी है। नीरज ने प्रेम और विरह को बेहद सहज शब्दों में पिरोया। सावन पर लिखा उनका यह शेर इसकी खूबसूरत मिसाल है-
"अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई,
मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई।"
सरसरती तौर पर यह शेर बारिश की बात करता हुआ लगता है, लेकिन इसके भीतर कई तरह की भावनाएं छिपी हैं। नीरज यहां बारिश को किस्मत और भावनाओं का प्रतीक बनाते हैं। वे कहते हैं कि इस बार सावन ने उनके साथ ऐसी शरारत की कि बारिश पूरे शहर में हुई, लेकिन उनके घर को छोड़ गई।
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इसका सीधा मतलब यह नहीं कि सचमुच उनके घर पर बारिश नहीं हुई। यहां घर दरअसल उस इंसान के जीवन, मन या हिस्से का नाम है, जो खुशी और प्रेम से वंचित रह गया। यानी दुनिया के बाकी लोगों को खुशियां, प्यार और राहत मिली, लेकिन कवि के हिस्से में खालीपन ही आया।
यही इस शेर की सबसे बड़ी खूबसूरती है। यह उस एहसास को शब्द देता है, जब इंसान को लगता है कि खुशियां हर किसी के दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं, बस उसके अपने दरवाजे को छोड़कर। प्रेम में असफल व्यक्ति, अकेलापन महसूस करने वाला इंसान या जीवन की कठिनाइयों से गुजर रहा कोई भी व्यक्ति इस शेर में खुद को आसानी से देख सकता है।
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शायद यही वजह है कि लंबे अरसे बाद भी नीरज का यह शेर उतना ही ताजा लगता है। सावन हर साल लौटता है, लेकिन हर किसी पर उसकी बारिश एक जैसी नहीं होती। किसी के लिए यह मौसम मुस्कुराहट लेकर आता है, तो किसी के लिए बीते हुए रिश्तों और अधूरी ख्वाहिशों की यादें। नीरज ने इसी विरोधाभास को सिर्फ दो पंक्तियों में अमर कर दिया।
