Roti vs Bhakhri: ऑफिस में लंच का समय था। मैंने अपना टिफिन खोला तो उस दिन रोटियां थोड़ी मोटी बन गई थीं। हंसते हुए मैंने कहा, कि आज तो मैं भाखरी लेकर आई हूं। लेकिन मेरी बात सुनकर मेरी गुजराती दोस्त मुस्कुरा दी। उसने कहा कि सिर्फ रोटी को मोटा बेल देने से वह भाखरी नहीं बन जाती।
मोटी रोटी को ही कहते हैं भाखरी, मेरी तरह ना करें गलती
लेकिन मैंने कहा कि मैंने तो हमेशा से ही जाना है कि अगर रोटी थोड़ी मोटी बन जाए या उसके लिए थोड़ा मोटे अनाज का आटा लिया जाए तो वह भाखरी कहलाती है। इस पर उसने मुझे समझाया कि भाखरी और रोटी का अंतर सिर्फ आकार या मोटाई का नहीं है। बल्कि दोनों के आटा गूंथने के तरीके, पकाने की तकनीक, टेक्सचर और इनके पीछे का पूरा फूड साइंस ही अलग है।
इसके बाद मैंने उसकी मम्मी और पॉपुलर शेफ सिद्धार्थ से भी बात की। तब समझ आया कि मेरी दोस्त गलत नहीं थी। वैसे दोनों ने अपने-अपने तरीके से एक ही बात समझाई कि रोटी और भाखरी दो अलग-अलग रेसिपी नहीं, बल्कि दो अलग Culinary Science हैं।
आइए समझते हैं कि आखिर दोनों के बीच असली अंतर क्या है और क्यों हर मोटी रोटी को भाखरी कहना सही नहीं माना जाता।
| मापदंड | रोटी (फुल्का) | पारंपरिक भाखरी |
|---|
| आटा (Dough) | नरम, अधिक पानी से गूंथा | सख्त, कम पानी और मोयन (घी/तेल) के साथ |
| टेक्सचर (Texture) | मुलायम, हवादार और लचीला | घनी (Dense), खस्ता और कुरकुरी |
| पकाने का तरीका | तेज आंच पर, जल्दी पकती है | धीमी आंच पर, दबाकर सेंकी जाती है |
| फूलने की क्षमता | भाप से फूलकर दो परतें बनती हैं | नहीं फूलती, अंदर तक समान रूप से पकती है |
| शेल्फ लाइफ | ताजा खाने पर सबसे अच्छी | 2–3 दिन तक अच्छी रहती है, सफर के लिए उपयुक्त |
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भाखरी क्या है, कैसे गूंथा जाता है इसके लिए आटा
मेरी दोस्त की मम्मी ने बताया कि भाखरी की पहचान उसकी मोटाई नहीं, उसका स्वभाव है। उन्होंने समझाया कि रोटी का आटा नरम गूंथा जाता है ताकि वह फूलकर मुलायम बने। जबकि भाखरी का आटा थोड़ा सख्त रखा जाता है। अक्सर इसमें थोड़ा घी या तेल (मोयन) भी मिलाया जाता है। फिर इसे आराम से, थोड़ा मोटा बेलकर धीमी आंच पर दबाते हुए सेंका जाता है। इसलिए इसका स्वाद, बनावट और खाने का अनुभव रोटी से बिल्कुल अलग होता है।
इसी के साथ उन्होंने बताया कि भाखरी आमतौर मोटे अनाज के आटे की बनाई जाती है जिनको अंदर तक सेंकने के लिए धीमे लेकिन लगातार आंच की जरूरत रहती है।
हालांकि इसके साथ ही उन्होंने हंसते हुए कहा कि अगर मोटी रोटी ही भाखरी होती, तो हर घर की पहली या आखिरी रोटी भाखरी कहलाती। उनकी इसी बात ने मेरी गलतफहमी दूर कर दी।
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शेफ ने बताया रोटी और भाखरी के अंतर का फूड साइंस
जब यही सवाल मैंने रायपुर के गो-हाइवे से जुड़े शेफ सिद्धार्थ मेहरा से पूछा तो उन्होंने उस घरेलू अनुभव को फूड साइंस की भाषा में समझाया। उनका कहना था कि रोटी और भाखरी का सबसे बड़ा अंतर ग्लूटेन, नमी (Moisture), फैट और हीट ट्रांसफर में होता है। यानी दोनों सिर्फ अलग आकार की ब्रेड नहीं हैं, बल्कि उनका पूरा बेस ही अलग है।
रोटी और भाखरी कहां- कैसे अलग हो जाते हैं
- रोटी और भाखरी का आटा एक जैसा नहीं होता : शेफ सिद्धार्थ मेहरा के अनुसार, रोटी का आटा ज्यादा पानी से गूंथा जाता है और उसे अच्छी तरह मसलकर तैयार किया जाता है। इससे ग्लूटेन का मजबूत जाल बनता है, जो रोटी को लचीला बनाता है। वहीं भाखरी में आटा अपेक्षाकृत सख्त रखा जाता है। कई पारंपरिक रेसिपी में पहले ही घी या तेल का मोयन मिला दिया जाता है। इससे ग्लूटेन का विकास सीमित रहता है और तैयार भाखरी खिंचने के बजाय हल्की खस्ता बनती है।
- सिर्फ मोटा बेल देने से भाखरी नहीं बनती : दोनों के बीच के अंतर को लेकर यही सबसे बड़ा कंफ्यूजन वाला पॉइंट है। अगर आप सामान्य रोटी के आटे को मोटा बेल दें, तो वह भाखरी नहीं बन जाएगी। ठंडी होने के बाद वह अक्सर सख्त और चबाने में भारी लग सकती है। भाखरी का अलग टेक्सचर उसकी पूरी रेसिपी और पकाने की प्रक्रिया से बनता है, केवल मोटाई से नहीं।
- दोनों का पकाने का तरीका बिल्कुल अलग है : रोटी तेज आंच पर जल्दी पकती है। अंदर बनने वाली भाप उसे फुला देती है और वह दो परतों वाली हो जाती है। वहीं भाखरी को अपेक्षाकृत धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसे पकाते समय हल्का दबाव भी दिया जाता है ताकि यह समान रूप से सिके। यही वजह है कि यह फूलती नहीं, बल्कि अंदर तक अच्छी तरह पकती है।
- टेक्सचर में यही असली फर्क है : रोटी मुलायम, लचीली और फोल्ड होने वाली होती है। वहीं भाखरी मोटी, हल्की खस्ता और भरपूर बाइट वाली होती है। इसे खाते समय इसका टेक्सचर ही सबसे पहले महसूस होता है।
- भाखरी ज्यादा समय ताजा रहती है : पश्चिम भारत के कई इलाकों में भाखरी इसलिए लोकप्रिय हुई क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती थी। धीमी आंच पर अच्छी तरह पकने और कई रेसिपी में घी या तेल होने के कारण इसकी नमी नियंत्रित रहती है। इसलिए किसान, चरवाहे और लंबी यात्रा करने वाले लोग इसे साथ ले जाते थे।
- क्या भाखरी सिर्फ गेहूं के आटे की होती है: बिल्कुल नहीं। गुजरात और महाराष्ट्र में गेहूं के अलावा बाजरा, ज्वार, मक्का और मल्टीग्रेन की भाखरी भी बनाई जाती है। मौसम, क्षेत्र और खानपान की परंपरा के अनुसार इसकी रेसिपी बदलती रहती है।
- रोटी और भाखरी में कुकिंग टाइम का भी है अंतर: मेरी दोस्त की मम्मी ने दोनों के अंतर को लेकर एक बात और कही। उन्होंने कहा कि रोटी जल्दी बनने वाला खाना है, वहीं भाखरी को बनाने में समय लगता है। यानी रोटी रोजमर्रा की रसोई की पहचान है, जबकि भाखरी धैर्य और पारंपरिक पाक-कौशल का हिस्सा है।
अब नहीं कहूंगी मोटी रोटी को भाखरी
इस पूरे अनुभव से मुझे समझ आया कि रोटी और भाखरी का अंतर सिर्फ मोटे और पतले का नहीं है। गुजराती दोस्त की मम्मी ने इसे रसोई के अनुभव से समझाया, जबकि शेफ सिद्धार्थ ने उसी बात को फूड साइंस की भाषा में बताया। और अब अगर कभी मेरी रोटी थोड़ी मोटी बन भी गई, तो मैं उसे भाखरी कहने से पहले दो बार जरूर सोचूंगी।
