तरुण और नेहा की नई-नई शादी हुई थी। 6 महीने में ही तकरार रोज की बात हो गई। दरअसल नेहा सेविंग्स पर फोकस करने वाली लड़की थी। वह म्यूचुअल फंड-एसआईपी वगैराह में पैसा डालती रहती। वहीं दूसरी तरफ तरुण खाओ पियो मौक करो वाली मानसिकता था। सेविंग्स उसकी प्राथमिकता कभी रहे ही नहीं। दोनों के बीच इन बातों पर झगड़ा इतना बढ़ा कि शादी टूटने के कगार पर पहुंच गई। कपल्स की फाइनेंशियल हेबिट्स में अंतर रिश्तों में दरार की बड़ी वजह बन रहा है।
कपल्स में पैसे की वजह से न हो झगड़ा (Photo: Freepik)
कौन सी फाइनेंशियल हैबिट्स रिश्तों में दरार लाती हैं?
1. बड़ा खर्च, बिना बताये
जब पार्टनर कहीं महंगा फोन या कार ले लेता है और दूसरे को जानकारी तक नहीं देता, तो भरोसा टूटता है। यह बहुत खतरनाक होता है।
2. कर्ज छुपाना
जब आप कहीं से कर्ज लेने की सोचते हैं या फिर ले चुके हैं तो अपने पार्टनर से डिस्कस जरूर करें। साथ मिलकर उस कर्ज को उतारने की कोशिश करें। एक दूसरे से छिपाना आपकी समस्याओं को बहुत बढ़ा सकता है।
3. निर्णय अकेले लेना
पैसे रुपये का खर्च और मैनेजमेंट हमेशा कपल्स को मिलकर करना चाहिए। कहीं खर्च या फिर इन्वेस्ट करने से पहले एक दूसरे की सला लेना ना भूलें।
4. कल की ना सोचना
कई पार शादी सिर्फ इस बात पर खराब होने लगती है कि कोई एक पार्टनर कभी फ्यूचर के लिए सेविंग करता ही नहीं है। उसे लगता है कि जो है वो आज ही है। वह आज में जीता है।
5. पैसे पर कंट्रोल
कई बार सारे वित्तीय फैसले कोई एक ही करता है। वह खर्च या निवेश करने से पहले अपने पार्टनर से डिस्कस तक करने की जरूरत नहीं समझता।
कैसे बचें इस समस्या से?
1. खुलकर बात करें
हर महीने एक समय रखें जब आप दोनों मिलकर अपनी आमदनी-खर्च, बचत-लक्ष्य पर चर्चा करें। आरोप लगाने की बजाय साझेदारी वाले अंदाज़ में बात करें।
2. टारगेट सेट करें
चाहे त्योहार पर जाना हो, छुट्टी की योजना हो या बचत-इनवेस्टमेंट, दोनो मिलकर तय करें कि क्या करना है।
3. फाइनेंशियल रेस्पॉन्सिबिलिटी बांटें
जरूरी नहीं कि दोनों की कमाई बराबर हो, लेकिन खर्च-बचत में सामंजस्य होना चाहिए।
4. हिसाब किताब रखें
खर्च और बचत का हिसाब-किताब रखिए। इससे अंदेशा कम होगा और बिना बताये खर्च कम होगा।
5. तालमेल रखें
यदि एक पार्टनर रिस्क लेने वाला है, दूसरा सुरक्षित मोड में है, तो उस अंतर को समझें और सलाह-मशविरा करें।
इन बातों को ध्यान में रखा जाए तो पैसा कभी रिश्तों में दरार की वजह नहीं बनेगा। हमेशा याद रखें कि हमारी फाइनेंशियल हैबिट्स शादी के बाद सिर्फ हमारी नहीं रह जातीं। इसलिए जरूरी है कि तालमेल के साथ अपनी आदतों में बदलाव या सुधार लाया जाए।
