Ramkrishna Paramhans Ke Prerak Prasang: रामकृष्ण परमहंस के प्रेरक प्रसंग जो दूर करते हैं अज्ञानता और अहंकार

Ramkrishna Paramhans Ke Prerak Prasang (रामकृष्ण परमहंस के प्रेरक प्रसंग): आज 19 फरवरी को रामकृष्ण परमहंस की जयंती के खास मौके पर आपको यहां से उनके प्रेरक प्रसंग जरूर पढ़ने चाहिए। गुरु रामकृष्ण की कहानियां आज भी प्रेरणा देने का काम करती हैं और अज्ञानता- अहंकार को दूर करती हैं।

Ramkrishna Paramhans Ke Prerak Prasang (रामकृष्ण परमहंस के प्रेरक प्रसंग): रामकृष्ण परमहंस 19वीं सदी के एक महान संत और आध्यात्मिक गुरु थे। उनका जन्म 1836 में पश्चिम बंगाल के कामारपुकुर गाँव में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत धार्मिक प्रवृत्ति के थे और माँ काली की भक्ति में लीन रहते थे। वे दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी भी रहे। रामकृष्ण परमहंस का मानना था कि सभी धर्म एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने सादगी, प्रेम और ईश्वर-भक्ति का संदेश दिया। उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद थे, जिन्होंने उनके विचारों को पूरे विश्व में फैलाया। आज रामकृष्ण परमहंस की जयंती है और इस खास मौके पर यहां उनके जीनन की कुछ प्रेरणादायक कहानियां यहां बताई गई हैं।

रामकृष्ण परमहंस के प्रेरक प्रसंग (pc: canva)

भगवान को किस चीज का लोभ

रामकृष्ण परमहंस के मथुरा बाबू नाम के एक शिष्य थे। एक बार उन्होंने एक सुन्दर मंदिर बनवाया और उसमें भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना करवाई। मूर्ति को विभिन्न प्रकार के बेशकीमती वस्त्राभूषणों से सजाया गया। दूर – दूर से लोग इस अनोखे मंदिर और मूर्ति के दर्शनार्थ आने लगे। तभी एक रात कुछ चोर मंदिर में घुसे और मूर्ति के सभी बेशकीमती आभूषणों को चुरा ले गये। सुबह जब लोगों ने देखा तो चारों ओर खबर आग की तरह फ़ैल गई। जब यह बात मथुरा बाबू को पता चली तो वह दौड़े- दौड़े मंदिर चले आये। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने खड़े दुखी होकर बोले – भगवान! आपके पास तो गदा और चक्र जैसे भयंकर हथियार है, जिनसे आपने कितने ही दुष्ट राक्षसों को मौत के घाट उतार दिया। फिर भी चोर आपके वस्त्राभूषण चोरी कर गये और आपने कुछ नहीं किया। आपसे तो हम मनुष्य अच्छे जो कमसे कम थोड़ा बहुत विरोध तो कर ही लेते है। रामकृष्ण परमहंस उस समय वही पास ही खड़े सब सुन रहे थे। वह मुस्कुराते हुए बोले- मथुरा बाबू ! भगवान को तुम्हारी तरह वस्त्राभूषणों का कोई लोभ- मोह नहीं, जो दिन रात अपनी नींद खराब करके उनकी चौकीदारी करें। और भगवान को कमी किस बात की है, जो उन तुच्छ गहनों के अपने अमोघ अस्त्रों का प्रयोग करें । मथुरा बाबू ने शर्म से सिर झुका लिया।

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