अभिनेता राजीव खंडेलवाल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बताया कि उनके पास 56 साल पुराने कप का एक सेट है। यह सेट उनके पापा मम्मी ने शादी के बाद बांग्लादेश बॉर्डर से खरीदा था। साल 2019 में राजीव की मां और फिर 2022 में उनके पिता का निधन हो गया। निशानी के तौर पर राजीव अपने पिता के घर से वह कप सेट अपने साथ ले आए। तब से वह रोज सुबह उसी कप में चाय पीते हैं।
क्यों उसी 56 साल पुराने कप में चाय पीते हैं राजीव खंडेलवाल
राजीव कहते हैं कि जब वह इस कप में चाय पीते हैं तो उन्हें लगता है कि वह अपनी मां के साथ बैठकर चाय पी रहे हैं। इस अनमोल कप को वह खुद से साफ करते हैं और संजो कर रखते हैं ताकि किसी से टूट ना जाए। वह बताते हैं कि उनके लिए ये महज एक कप सेट भर नहीं है, उनकी मां की यादों का बहुत प्यारा हिस्सा भी है।
क्या अपनों की चीजों का मोह सामान्य है?
यहां सवाल ये उठता है कि क्या किसी अपने के निधन के बाद उसकी चीजों से इतना ज्यादा कनेक्ट हो जाना नॉर्मल है? उन निशानियों की मोह में फंसे रहे जाना क्या मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठी है? इन सवालों ने हमें भी सोचने पर मजबूर किया। जवाब तलाशने के लिए इंटरनेट खंगाला। इंटरनेट खंगालने पर पता चला कि बहुत से मनोविज्ञान इसे सामान्य बताता है।
क्या कहता है मनोविज्ञान
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, राजीव की यह आदत मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। इस आदत या लगाव को थैरेप्यूटिक नॉस्टेल्जिया कहा जाता है। जब हम अपने उन करीबियों की चीजों का इस्तेमाल करते हैं जो अब हमारे साथ नहीं हैं, तो हमें एक सुरक्षा और अपनेपन का एहसास होता है। यह हमारे अकेलेपन को कम करता है।
मनोविज्ञान में कुछ जगह इस तरह के रिश्ते को कंटीन्यूइंग बॉन्ड्स भी कहा गया है। इसका अर्थ है कि किसी प्रियजन के निधन के बाद भी हम उसके साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाए रखते हैं। निशानियां उस रिश्ते को जिंदा रखने का माध्यम बन जाती हैं।
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यादों को सहारा नहीं साथी बनाएं
कुछ मनोवैज्ञानिक ऐसी आदतों पर सचेत रहने की सलाह भी देते हैं। वो कहते हैं कि किसी अपने की यादों को सहेजना सामान्य और स्वस्थ्य तो है, लेकिन कोई व्यक्ति केवल उन निशानियों के सहारे ही जीवन जीने लगे और आगे ही ना बढ़े तो यह ठीक नहीं है। ऐसा करना उसके मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि भावनाओं और हकीकत के बीच एक संतुलन बनाए रखना चाहिए।
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हमने कई एक्सपर्ट्स की राय जानी और जब उन सबकी सलाह का निचोड़ निकाला तो पाया कि किसी अपने की निशानी के साथ जिंदगी बिताना सामान्य है, लेकिन किसी अपने की निशानी के सहारे ही जिंदगी बिताना गलत। सही तरीका है कि आप जीवन में आगे बढ़ें। आगे बढ़ने के इस क्रम में उन निशानियों को अपने साथ ले कर बढ़ें। उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, ना कि पूरी जीवन।
राजीव खंडेलवाल भी यही कर रहे हैं। वह अपने पापा मम्मी की अनमोल यादों को अपनी जिंदगी में शामिल कर अपनी लाइफ जी रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं।
