Psychology of Discount: क्यों डिस्काउंट देख फिसल जाता है मन, जानें क्या कहता है छूट का मनोविज्ञान

डिस्काउंट वास्तविक भी हो सकता है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हम छूट को जरूरत का प्रमाण समझ लेते हैं। किसी चीज पर 70 प्रतिशत की छूट है, इसका मतलब यह नहीं कि वह चीज खरीदना जरूरी है।

Psychology of Discount: किसी दुकान पर 50 प्रतिशत डिस्काउंट का बोर्ड लगा हो तो नजर अपने आप वहां चली जाती है। ऑनलाइन शॉपिंग में किसी चीज की कीमत 4,999 रुपये से घटकर 2,499 रुपये दिखे तो दिमाग तुरंत कहता है- आधा पैसा बच रहा है। कई बार हम वह सामान खरीद भी लेते हैं, जिसकी हमें जरूरत नहीं थी। सवाल है कि ऐसा क्यों होता है? क्या सचमुच हमें डिस्काउंट पसंद है या फिर दुकानदार हमारे दिमाग के कुछ खास मनोवैज्ञानिक पैटर्न को समझकर कीमत दिखाता है?

Psychology of Discount

मनोविज्ञान से जानें क्यों डिस्काउंट के फेर में फंस जाता है इंसान (Photo: iStock)

व्यवहारिक अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान में इसका काफी अध्ययन हुआ है। डेनियल काह्नमैन और एमोस ट्वरस्की के काम ने यह समझने में मदद की कि इंसान आर्थिक फैसले हमेशा पूरी तरह तर्क के आधार पर नहीं लेता। खरीदारी में भावनाएं, तुलना और पहली दिखाई गई कीमत भी बड़ा असर डालती हैं।

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