Monsoon Shayari in Hindi (बरसात पर शायरी): मानसून सिर्फ़ बारिश नहीं, जीवन का उत्सव है। काले मेघों की स्याही से लिखी बूंदें धरती की गोद में बरसती हैं। सोंधी मिट्टी की महक, हवाओं का राग और पत्तों पर थिरकती बूंदें..सब मिलकर जीवन का उत्सव रचते हैं। सूखी धरती हरियाली ओढ़ती है, नदियां गीत गाती हैं और किसान के चेहरे पर मुस्कान खिलती है। गांव की गलियों में बच्चे कागज़ की नाव चलाते हैं, तो शहरों में कॉफी की चुस्कियों के साथ मानसून की रिमझिम के मजे लिये जाते हैं। यह मौसम प्रेमियों के लिए काव्य, सपने देखने वालों के लिए प्रेरणा और थके मन के लिए सुकून लाता है। मानसून की गर्जना साहस जगाती है और उसकी शांति आत्मा को ठंडक देती है। यह प्रकृति का जादू है, जो हर दिल को भिगो देता है। इसी मानसून पर कई मशहूर शायरों ने बेहतरीन शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं मानसून पर लिखे चंद शेर:
Monsoon Shayari (मानसून शायरी, बारिश पर शायरी)
Best Shayari on Monsoon in Hindi 2 line | बारिश पर शायरी हिंदी में
1. उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
- जमाल एहसानी
2. मैं वो सहरा जिसे पानी की हवस ले डूबी
तू वो बादल जो कभी टूट के बरसा ही नहीं
- सुल्तान अख़्तर
3. बारिश शराब-ए-अर्श है ये सोच कर 'अदम'
बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया
- अब्दुल हमीद अदम
Monsoon Shayari in hindi
4. दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
- क़तील शिफ़ाई
5. बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी
बादल जो नज़र आए बदली मेरी नीयत भी
- हसरत मोहानी
6. टूट पड़ती थीं घटाएं जिन की आंखें देख कर
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए
- सज्जाद बाक़र रिज़वी
Best Monsoon Shayari
7. कच्चे मकान जितने थे बारिश में बह गए
वर्ना जो मेरा दुख था वो दुख उम्र भर का था
- अख़्तर होशियारपुरी
8. ओस से प्यास कहाँ बुझती है
मूसला-धार बरस मेरी जान
- राजेन्द्र मनचंदा बानी
9. क्यूं मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो
- जाज़िब क़ुरैशी
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10. बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
- निदा फ़ाज़ली
11. भीगी मिट्टी की महक प्यास बढ़ा देती है
दर्द बरसात की बूंदों में बसा करता है
- मरग़ूब अली
12. हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया
- सुदर्शन फ़ाकिर
13. गुनगुनाती हुई आती हैं फ़लक से बूंदें
कोई बदली तिरी पाज़ेब से टकराई है
- क़तील शिफ़ाई
14. अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियां होना ही था
अपनी कच्ची बस्तियों को बे-निशां होना ही था
- मोहसिन नक़वी
15. दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़
अब के बादल ने बहुत की मेहरबानी हर तरफ़
- शबाब ललित
उम्मीद करते हैं बरसात पर लिखे ये शेर आपको पसंद आए होंगे। अगर तमाम शायरों के ये शेर आपको पसंद आए हों तो आप इन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं। ऐसे ही तमाम बेहतरीन शेर और शायरी के लिए आप हमें पढ़ते रहिए।
