Mango Shayari in Hindi: गर्मियों के मौसम की एक बात जो सबसे अच्छी होती है वो ये है कि ये अपने साथ ढेर सारे आम लेकर आता है। जी हां, ज्यादातर लोगों के लिए आम गर्मियों की मिठास का सबसे खूबसूरत एहसास है। इसकी खुशबू में बचपन की यादें घुली होती हैं और इसके स्वाद में मानों ना जाने कितनी ही भावनाएं। आम की हर किस्म, हर रंग और हर रस में एक अलग कहानी छिपी होती है। कहीं यह पहली मोहब्बत की तरह मीठा लगता है, तो कहीं बिछड़ते पलों की तरह हल्की सी कसक भी दे जाता है।
आम पर खास शेर
शायरों ने भी आम से जुड़े एहसासों को बहुत ही खूबसूरती से अपनी कलम से संवारा है। आम पर लिखी गई शायरी में प्रकृति की खूबसूरती, प्रेम की मिठास और जीवन की सरलता सब एक साथ नजर आती है। यही वजह है कि आम हर मौसम में नहीं, लेकिन जब आता है, तो शायरी का मौसम जरूर ले आता है। तो आइए पढ़ते हैं आम पर लिखे कुछ मशहूर शेर। यहां देखें आम पर शायरी हिंदी में:
आम पर शायरी 2 लाइन
1. असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर', इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुंचा
- अकबर इलाहाबादी
2. नायाब आम लुत्फ़ हुए रंग रंग के, कोई है ज़र्द कोई हरा कुछ हैं लाल लाल
- जलील मानिकपूरी
3. आम तेरी ये ख़ुश-नसीबी है, वर्ना लंगड़ों पे कौन मरता है
- साग़र ख़य्यामी
4. मिरा जज़्बा-ए-शौक़ काम आ रहा है,कि बाज़ार में देखूं आम आ रहा है
- शाहीन इकबाल असर
5. मौसम तुम्हारे साथ का जाने किधर गया, तुम आए और बौर न आया दरख़्त पर
- अब्बास ताबिश
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6. जरा ठहर जा ए जिंदगी,आम अभी पक रहा है, मिठास की तलाश में
- अज्ञात
7. जिस खास के लिए आप खास नहीं,उसे आम कीजिये, किस्सा तमाम कीजिए..!
- खालिद
8. उन से हम रक्खें ज़ियादा रब्त क्यूं, शौक़ जो रखते हैं कम कम आम का
- शाहीन इकबाल असर
9. असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर', इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुंचा..
- अकबर इलाहाबादी
10. नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए, इस फ़स्ल में जो भेजिए बस आम भेजिए
- अकबर इलाहाबादी
11. हो रहा है ज़िक्र पैहम आम का, आ रहा है फिर से मौसम आम का
- शाहीन इकबाल असर
12. मोड़ पे देखा है वो बूढ़ा-सा इक आम का पेड़ कभी?
मेरा वाकिफ़ है बहुत सालों से, मैं जानता हूं
- गुलजार
13. हो रहा है ज़िक्र पैहम आम का
आ रहा है फिर से मौसम आम का
- शाहीन इकबाल
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