Majaz Lakhnavi Shayari (मजाज़ की नज्में): उर्दू अदब की दुनिया में मजाज़ लखनवी का नाम बड़ी इज्जत से लिया जाता है। शेर-ओ-शायरी के शहगर में मजाज़ ने ऐसी लोकप्रियता हासिल की जो हर किसी को नसीब नहीं होती है। मजाज़ को ये दुनिया रास ना आई। उन्होंने 44 साल की उम्र में इसे अलविदा कह फानी दुनिया का सफर कर लिया। लेकिन जाने से पहले वो एक से बढ़कर एक नज्म औक कलाम लिख गए। मजाज़ की शख्सियत और शायरी में ऐसा आकर्षण था कि वह हर महफिल में छा जाते थे। मजाज़ ने कम लिखा लेकिन ऐसा लिखा कि उसे सदियों तक पढ़ा जाएगा। आइए डालते हैं एक नजर उनके लिखे चंद मशहूर शेरों पर:
Majaz Lakhnavi Shayari, Majaz ki Shayari
हमेशा ख़ून पीकर हड्डियों के रथ में चलती है
ज़माना चीख़ उठता है ये जब पहलू बदलती है
कब किया था इस दिल पर हुस्न ने करम इतना
मेहरबाँ और इस दर्जा कब था आसमाँ अपना
तेरे माथे पे ये आँचल तो बहुत ही ख़ूब है लेकिन
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था
नूर ही नूर है किस सम्त उठाऊं आंखें
हुस्न ही हुस्न है ता हद्दे नजर आज की रात
आंख से आंख जब नहीं मिलती, दिल से दिल का कलाम होता है
हुस्न को शर्मसार करना ही इश्क़ का इन्तक़ाम होता है
दफ़्न कर सकता हूँ सीने में तुम्हारे राज़ को
और तुम चाहो तो अफ़्साना बना सकता हूँ मैं
ये महताब नहीं है कि आफ़ताब नहीं
सभी हैं हुस्न मगर इश्क़ का जवाब नहीं
मोहब्बत का हर भेद पाना भी है
मगर अपना दामन बचाना भी है
हुस्न का ग़म भी हसीं फ़िक्र हसीं दर्द हसीं
उन को हर रंग में हर तौर सँवर जाना था
दिल धड़क उठता है ख़ुद अपनी ही हर आहट पर
अब क़दम मंज़िल-ए-जानाँ से बहुत दूर नहीं
दफ़्न कर सकता हूं सीने में तुम्हारे राज़ को
और तुम चाहो तो अफ़्साना बना सकता हूं मैं
हाय वह वक्त कि बेपिये बेहोशी थी,
हाय यह वक्त कि पीकर भी मख्मूर नहीं।
बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है
ख़ुद दिल में रहके आंख से पर्दा करे कोई
हां लुत्फ जब है पा के ढूंढा करे कोई
वां इशारे में बहक जाना ही ऐने होश है
होश में रहना यक़ीनन सख़्त नादानी है आज
क्या-क्या हुआ है हमसे जुनूं में न पूछिए
उलझे कभी ज़मीं से, कभी आसमां से हम
छलकती है जो तेरे जाम से उस मय का क्या कहना
तेरे शादाब होठों की मगर कुछ और है साक़ी
तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाख़ुदा दुनिया
बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं
ये आना कोई आना है कि बस रस्मन चले आए
ये मिलना ख़ाक मिलना है कि दिल से दिल नहीं मिलता
जिगर और दिल को बचाना भी है
नज़र आप ही से मिलाना भी है
वो मुझको चाहती है, और मुझ तक आ नहीं सकती
मैं उसको पूजता हूं, और उसको पा नहीं सकता
बता दें कि मजाज़ का असली नाम असरार उल हक़ था। उनकी पैदाइश लखनऊ के करीब बाराबंकी शहर में हुई थी। वह आगरा में पले-बढ़े और वहीं तालीम हासिल की। पिता इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन मजाज़ तो मुहब्बत और इन्किलाब के लिए पैदा हुए थे। उम्मीद करते हैं आपको मजाज़ के ये चुनिंदा शेर जरूर पसंद आए होंगे।
