मिर्जा गालिब से किसी ने एक बार पूछा कि मिर्जा साहब आम कैसे होने चाहिए? उन्होंने तपाक से जवाब दिया- एक तो मीठे हों और दूसरे भरपूर हो। दरअसल फलों के राजा आम में बात ही कुछ ऐसी है कि ये किसी का भी मन मोह ले। शायद इसी कारण हाल ही में जब पीएम नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर गए तो अपने साथ बतौर उपहार आम भी ले गए।
प्रतीकात्मक फोटो (AI Generated Image)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को गुजरात का मशहूर केसर आम गिफ्ट किया। यह आम अपने खास स्वाद और मिठास के कारण 'क्वीन ऑफ मैंगोज' भी कहलाता है। दशहरी, लंगड़ा, अल्फांसो और चौसा जैसे कई मशहूर आमों के बीच केसर आम की खुशबू, रंग और स्वाद ही इसकी खास पहचान है।
गुजरात में गिरनार की पहाड़ियों के आसपास उगने वाला यह आम ऊपर से तो देखने में दूसरे आमों की ही तरह होता है लेकिन जब इसे काटते हैं तो अंदर का गूदा बिल्कुल गहरे केसरिया रंग का होता है। इसका स्वाद भी केसर की तरह ही शाही और बेहतरीन होता है। इसकी मिठास इतनी जबरदस्त होती है कि एक बार चखने के बाद इसका स्वाद जुबान से उतरता नहीं है। अपने केसरिया रंग और अलग तरह के मिठास की वजह से इसे आमों की रानी भी कहा जाता है।
जूनागढ़ से जुड़ा है केसर आम का इतिहास
पुराने लोग बताते हैं कि 1930 के दशक में जूनागढ़ के पास वंथली इलाके में रवायु बाग नाम का एक आम का बाग हुआ करता था। उस समय आम की अलग-अलग किस्मों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। लोगों को ना तो किस्म का पता था और ना ही अलग स्वाद का। उनके लिए सारे आम बस एक मीठे रसीले फल की तरह ही थे।
एक बार हुआ यूं कि जूनागढ़ के नवाब के वजीर साले भाई एक बार उस बाग में पहुंचे। आम के मौसम में उन्होंने वहां के आम चखे और उनके स्वाद से चौंक गए। वे वहां के पेड़ों से कुछ ताजा आम तोड़कर अपने साथ मंगरोल ले गए और वहां के शेख को भेंट किए। शेख साहब को भी उनका स्वाद इतना पसंद आया कि उन्होंने वजीर को 'साल- ए-हिंद' का तमगा और आम को 'साले भाई नी आमड़ी' (साले भाई के आम) नाम दे दिया।
आम को किसने दिया केसर नाम
जब जूनागढ़ के नवाब महाबत खान तृतीय को साले भाई नी आमड़ी के बारे में पता चला, तो उन्होंने अपने गार्डन सुपरिटेंडेंट मिस्टर अयंगर को इसकी जांच-पड़ताल का जिम्मा सौंपा। अयंगर ने काफी रिसर्च के बाद रवायु बाग से 80 पौधे जूनागढ़ के राजवाड़ी फार्म में लगवाए, जिनमें से 75 पौधे जीवित बचे। चार साल बाद जब इन पेड़ों पर फल आए, तो उन्हें नवाब के सामने पेश किया गया। आम के गूदे का चमकीला केसरिया रंग देखकर नवाब ने इसका नाम केसर रख दिया।
समय के साथ केसर आम की लोकप्रियता बढ़ने लगी। महाशिवरात्रि के दौरान किसानों को रियायती दरों पर इसके पौधे दिए जाते थे, जिससे इसकी खेती पूरे गुजरात में फैल गई। अयंगर ने अपने नोट्स में लिखा कि उन्होंने भारत और एशिया के कई हिस्सों में आम चखे, लेकिन स्वाद के मामले में केसर आम जैसा कोई नहीं लगा।
आज केसर आम सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है। इसकी खेती महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक फैल चुकी है और विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि इसकी पहचान आज भी गुजरात के गिर क्षेत्र से जुड़ी है। इस गिर केसर आम को जीआई टैग भी मिल चुका है।
क्यों इतना खास है केसर आम?
केसर आम की सबसे बड़ी खासियत उसकी खुशबू और गाढ़ा मीठा स्वाद है। इसका गूदा मुलायम और बिना ज्यादा रेशों वाला होता है। यही वजह है कि लोग इसे सीधे खाने के अलावा आमरस, मिठाइयों, आइसक्रीम और शेक्स में भी खूब इस्तेमाल करते हैं। जब यह पूरी तरह पक जाता है, तब इसका रंग सुनहरा नारंगी हो जाता है और इसकी महक दूर से ही महसूस की जा सकती है।
केसर आम की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यह दूसरे आमों की तुलना में जल्दी पककर तैयार हो जाता है। केसर आम मई के महीने के शुरुआत में ही बाजार में आ जाते हैं। केसर आम ऐसी वैरायटी है जिसका साइज ना तो बहुत बड़ा होता है और न ही बहुत छोटा। मीडियम साइज का इसका आकार ही इसे खाने और परोसने के लिए एकदम परफेक्ट बनाता है।
किसानों के लिए भी है खास
गुजरात के कई किसानों की आजीविका केसर आम की खेती पर निर्भर करती है। हर साल गर्मियों में देश-विदेश से इसकी मांग बढ़ जाती है। खास तौर पर खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में भारतीय केसर आम काफी पसंद किया जाता है।
